जयपुर के आसमान में दिखा सेना का शौर्य: राज्यपाल, रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में गूंजा पराक्रम का जयघोष
जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित 'शौर्य संध्या' में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भारतीय सेना के पराक्रम को नमन किया। थल सेना दिवस पर सूरतगढ़ में 'प्रोजेक्ट नमन' के 100वें केंद्र का शुभारंभ हुआ और शहीदों को सम्मानित किया गया। 1000 ड्रोन्स के शो ने सेना की आधुनिक शक्ति का प्रदर्शन कर जयपुर वासियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जयपुर। राजस्थान की गुलाबी नगरी के सवाई मानसिंह स्टेडियम में गुरुवार की शाम थल सेना के अदम्य साहस, वीरता और गौरवमयी इतिहास की साक्षी बनी। अवसर था 'शौर्य संध्या' का, जहां भारतीय सेना के पराक्रम ने न केवल आसमान को गौरवान्वित किया, बल्कि उपस्थित जनसमूह के भीतर राष्ट्रभक्ति का नया संचार कर दिया। राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने इस भव्य समारोह में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए भारतीय सेना की अटूट वीरता की हृदय से सराहना की। थल सेना दिवस के इस पावन उपलक्ष्य पर पूरा स्टेडियम सेना के शौर्य के नारों से गुंजायमान रहा।
समारोह की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंच पर देश के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के साथ मिजोरम के राज्यपाल श्री वी. के. सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा और विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी सहित कई गणमान्य जन मौजूद रहे। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने थल सेना दिवस पर देश के प्रहरियों को बधाई देते हुए उनके त्याग और समर्पण को नमन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'प्रोजेक्ट नमन' के सौवें केंद्र का शुभारंभ रहा, जिसे रक्षा मंत्री द्वारा सूरतगढ़ में ऑनलाइन लोकार्पित किया गया। यह केंद्र पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिजनों को कल्याणकारी योजनाओं से सीधे लाभान्वित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा, जिसके लिए राज्यपाल ने केंद्र सरकार का विशेष आभार व्यक्त किया।
शौर्य संध्या के दौरान भावुक और गौरवपूर्ण क्षण तब आए जब रक्षा मंत्री ने मां भारती की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों को मरणोपरांत सम्मानित किया और 'फर्स्ट डे कवर' का अनावरण किया। इस अवसर पर सेना के साहस पर आधारित एक विशेष मल्टीमीडिया फिल्म और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने देश की विविधता और एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम के समापन की ओर जब एक हजार ड्रोन्स ने जयपुर के आसमान में अपनी कलाबाजी दिखाई, तो दृश्य अत्यंत मनोहारी और आधुनिक भारत की शक्ति का प्रतीक बन गया। यह आयोजन न केवल सेना के सम्मान का माध्यम बना, बल्कि युवा पीढ़ी के भीतर मातृभूमि की रक्षा के प्रति संकल्प को और अधिक सुदृढ़ कर गया।

Pratahkal Bureau
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