नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में संशोधित पार्वती–कालीसिंध–चंबल (पीकेसी) लिंक परियोजना को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। भारत मंडपम में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक ने पूर्वी राजस्थान के जल भविष्य को नई दिशा देने का संकेत दिया है। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण (एनडब्ल्यूडीए) सोसायटी की 39वीं वार्षिक बैठक और नदियों के आपसी जोड़ से जुड़ी विशेष समिति (एससीआईएलआर) की 24वीं बैठक एक साथ आयोजित की गई, जिसमें राजस्थान सहित कई राज्यों के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में राजस्थान के जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने संशोधित पीकेसी लिंक परियोजना को राज्य के लिए जीवनरेखा बताते हुए मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश को जल आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस निर्णय लिए जा रहे हैं और यह परियोजना उसी विजन का अहम हिस्सा है। चर्चा के दौरान राजस्थान और मध्यप्रदेश के जल संसाधनों के संतुलित एवं अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।

श्री रावत ने बताया कि राजस्थान से जुड़े परियोजना घटकों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्रीय जल आयोग के ई-पीएएमएस पोर्टल पर मूल्यांकन के लिए अपलोड की जा चुकी है। तकनीकी और लागत संबंधी आकलन अंतिम चरण में हैं, जिसके बाद परियोजना को सार्वजनिक निवेश बोर्ड और केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने डीपीआर को शीघ्र मंजूरी दिलाने का आग्रह करते हुए बताया कि अतिरिक्त घटकों की जानकारी एनडब्ल्यूडीए, केंद्रीय जल आयोग और मध्यप्रदेश सरकार को पहले ही भेजी जा चुकी है।

संशोधित पीकेसी लिंक परियोजना से पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। परियोजना के तहत राज्य को कुल 4102.60 एमसीएम जल उपलब्ध होगा, जिससे लगभग 4 लाख 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित की जा सकेगी। इसमें नए सिंचाई क्षेत्र के साथ-साथ मौजूदा क्षेत्रों का पुनर्स्थापन और रिसाइकल जल के उपयोग से सिंचाई भी शामिल है। यह पहल कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जल प्रबंधन को भी मजबूती देगी।

स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बारां, झालावाड़ और कोटा जिलों के लिए 12 नई सिंचाई परियोजनाओं को संशोधित लिंक परियोजना में अतिरिक्त घटक के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया। इससे लगभग 70 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही दिल्ली–मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर के अंतर्गत कोटपूतली-बहरोड़ जिले में विकसित हो रहे जापानी और कोरियाई औद्योगिक क्षेत्रों की दीर्घकालीन पेयजल और औद्योगिक जल मांग को पूरा करने के लिए राजगढ़ और नीमराना तहसीलों में अतिरिक्त कृत्रिम जलाशयों के निर्माण का प्रस्ताव भी डीपीआर में शामिल करने का आग्रह किया गया।

वित्तीय संरचना को लेकर भी बैठक में अहम मांग रखी गई। श्री रावत ने केन–बेतवा लिंक परियोजना की तर्ज पर संशोधित पीकेसी लिंक परियोजना को 90 प्रतिशत केंद्रीय और 10 प्रतिशत राज्य वित्त पोषण के आधार पर स्वीकृत करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जल सुरक्षा, कृषि विकास और क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

बैठक के दौरान चंबल से बनास नदी को जोड़ने की नई लिंक परियोजना का मुद्दा भी उठाया गया। श्री रावत ने बताया कि वर्ष 2019 में चंबल नदी में आई बाढ़ के अध्ययन के बाद केंद्रीय जल आयोग ने बाढ़ जल के उपयोग की सिफारिश की थी। इसी आधार पर राजस्थान सरकार ने करीब 7900 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार कर केंद्र को भेजी है। इस योजना से आठ जिलों को बाढ़ से राहत मिलने की संभावना है और इसे शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया गया।

इस उच्चस्तरीय बैठक में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार, उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह, गुजरात के मंत्री श्री ईश्वर सिंह पटेल, मध्यप्रदेश के जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और राजस्थान वाटर ग्रिड कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक श्री रवि सोलंकी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का समापन इस भरोसे के साथ हुआ कि संशोधित पीकेसी लिंक परियोजना पूर्वी राजस्थान के लिए जल सुरक्षा की मजबूत आधारशिला साबित होगी और राज्य के विकास को नई गति देगी।

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