जयपुर। गुलाबी नगरी की ठिठुरती सर्द हवाओं के बीच जयपुर का कोना-कोना अब एक जीवंत कैनवास के रूप में नजर आने वाला है। कला और संस्कृति की विरासत को समेटे हुए जयपुर शहर आगामी 27 जनवरी से 'जयपुर आर्ट वीक 5.0' के भव्य आयोजन का गवाह बनेगा। पब्लिक आर्ट्स ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पाटी) द्वारा आयोजित इस सात दिवसीय कला उत्सव का औपचारिक उद्घाटन 27 जनवरी को केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के कर-कमलों द्वारा किया जाएगा। यह आयोजन न केवल राजस्थान की पारंपरिक पहचान को वैश्विक पटल पर रखेगा, बल्कि आधुनिक कला के विविध आयामों से भी रूबरू कराएगा।

शहर के 11 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को इस महोत्सव के लिए मुख्य केंद्र बनाया गया है, जहां कला प्रेमियों के लिए निःशुल्क प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी। इन स्थलों में अलसीसर हवेली, अम्रपाली म्यूज़ियम, बड़ी चौपड़, सेंट्रल पार्क, छोटी चौपड़, ज्ञान म्यूज़ियम, जवाहर कला केंद्र, नारायण निवास, पिंक सिटी स्टूडियो, पाटी मुख्यालय और राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर शामिल हैं। सात दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में दुनिया भर के 100 से अधिक दिग्गज और उभरते कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जिसमें 15 से अधिक एकल प्रस्तुतियां और विशेष समूह प्रदर्शनियां दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

जयपुर आर्ट वीक की संस्थापक एवं चेयरपर्सन सना रेज़वान ने इस आयोजन की दूरदर्शिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह उत्सव जयपुर को अतीत और वर्तमान के संगम के रूप में देखने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। उनके अनुसार, यह मंच विशेष रूप से युवा और उभरते कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय धरातल मुहैया कराता है, जिसके लिए कलाकारों का चयन एक पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय 'ओपन कॉल' के माध्यम से किया गया है। यह पहल स्थानीय समुदायों को समकालीन कला से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।

इस वर्ष के आयोजन का मुख्य आकर्षण समूह प्रदर्शनी ‘आवतो बैरो बाजे’ है, जिसमें उन 12 उभरते कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित की जाएंगी जिनका राजस्थान से गहरा नाता है। ये कलाकार राज्य की पारंपरिक और रूमानी छवियों से हटकर शहरीकरण, विरासत संरक्षण की चुनौतियों और पर्यावरणीय चिंताओं जैसे ज्वलंत विषयों पर अपनी कलात्मक टिप्पणी प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही, प्रसिद्ध कलाकार अनिता दुबे द्वारा क्यूरेट की गई प्रदर्शनी ‘अंधा युग’ भी बौद्धिक विमर्श का केंद्र होगी। धर्मवीर भारती की अमर कृति से प्रेरित इस प्रदर्शनी में 50 से अधिक कलाकार आज के दौर के नैतिक, राजनीतिक और सामाजिक संकटों, सत्ता की प्रकृति और सामूहिक जिम्मेदारी जैसे गंभीर सवालों को अपनी कला के माध्यम से टटोलेंगे।

3 फरवरी तक चलने वाले इस कला महाकुंभ में केवल प्रदर्शनियां ही नहीं, बल्कि कलाकारों और क्यूरेटरों के साथ वॉकथ्रू, गहन पैनल चर्चाएं, रचनात्मक कार्यशालाएं, कलात्मक प्रदर्शन, फिल्म स्क्रीनिंग और जीवंत संवाद भी आयोजित होंगे। यह महोत्सव न केवल जयपुर की सांस्कृतिक समृद्धि को नया विस्तार देगा, बल्कि कला के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच एक सार्थक वैचारिक पुल का निर्माण भी करेगा।

Pratahkal Newsroom

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