उदयपुर की झीलों की नगरी से गूंजा ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र: सहकारिता मंत्रालय की दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस संपन्न
उदयपुर में संपन्न हुई सहकारिता मंत्रालय की दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस में 'सहकार से समृद्धि' का भविष्य का रोडमैप तैयार किया गया। सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने पैक्स के डिजिटलीकरण और विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के लक्ष्यों को साझा किया। राजस्थान की सहकारिता सचिव श्रीमती आनन्दी सहित देश भर के विशेषज्ञों ने सहकारी समितियों को पेशेवर और व्यावसायिक मॉडल बनाने पर मंथन किया।

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा और आधुनिक कलेवर देने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शुक्रवार को एक संकल्प के साथ संपन्न हुई। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित इस उच्च स्तरीय विमर्श का मुख्य केंद्र 'सहकार से समृद्धि' के विजन को धरातल पर उतारना और सहकारी संस्थानों को पारंपरिक ढर्रे से निकालकर एक पेशेवर व्यावसायिक मॉडल के रूप में स्थापित करना रहा। समापन सत्र तक पहुँचते-पहुँचते यह स्पष्ट हो गया कि आने वाला समय भारतीय सहकारिता के डिजिटलीकरण और विश्व स्तरीय भंडारण क्षमता के विस्तार का होगा।
कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सहकारी क्षेत्र की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए इसे मजबूत, पेशेवर और आधुनिक व्यावसायिक मॉडल बनाना समय की मांग है। उन्होंने प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उनके पूर्ण कंप्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण पर जोर दिया, जिससे न केवल पारदर्शिता आएगी बल्कि कार्यक्षमता में भी अभूतपूर्व सुधार होगा। डॉ. भूटानी ने भविष्य का खाका पेश करते हुए बताया कि मंत्रालय विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना पर तीव्र गति से कार्य कर रहा है, जिसके तहत सितंबर 2026 तक 5 लाख मीट्रिक टन और सितंबर 2027 तक 50 लाख मीट्रिक टन क्षमता वृद्धि का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने नियमों के सरलीकरण और ‘भारत टैक्सी’ जैसी अभिनव पहलों के माध्यम से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
विमर्श के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों की श्रृंखला में पैक्स के पुनर्जीवन पर गहन मंथन हुआ। 'सहकार से समृद्धि - पैक्स अहेड' सत्र में राजस्थान की सहकारिता सचिव एवं रजिस्ट्रार श्रीमती आनन्दी ने प्रदेश के निमोद एवं रामगढ़ सहकारी समितियों के सफल प्रयोगों को प्रस्तुत करते हुए राज्य में पैक्स सशक्तिकरण के प्रयासों को रेखांकित किया। इसी सत्र में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों के साथ-साथ नाबार्ड और एफसीआई के अधिकारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उत्तर-पूर्वी राज्यों में सहकारिता विकास और डेयरी-मत्स्य समितियों की सफलता की कहानियों ने यह दर्शाया कि तकनीकी नवाचारों के माध्यम से कैसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदली जा सकती है।
कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वयं सहायता समूहों और एफपीओ को पैक्स के साथ एकीकृत करने, माइक्रो एटीएम और रूपे किसान क्रेडिट कार्ड के वितरण जैसे वित्तीय समावेशन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा हुई। मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री सिद्धार्थ जैन ने सभी राज्यों से मिली प्रतिक्रियाओं को उत्साहजनक बताते हुए टीम भावना से कार्य करने की अपील की और धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधियों ने उदयपुर और राजसमंद की विभिन्न सहकारी समितियों का प्रत्यक्ष भ्रमण कर वहां के जमीनी कार्यों का अवलोकन किया। यह कॉन्फ्रेंस न केवल संवाद का मंच बनी, बल्कि इसने भारतीय सहकारिता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया है, जो आने वाले वर्षों में ग्रामीण समृद्धि का आधार बनेगा।

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