जयपुर में गूँजी जनजातीय अस्मिता की हुंकार: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने आदिवासी युवाओं को दिया उच्च सेवाओं में परचम लहराने का मंत्र
जयपुर के लोकभवन में आयोजित 'आदिवासी युवा आदान प्रदान कार्यक्रम' में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने ओडिसा, छत्तीसगढ़ और झारखंड सहित कई राज्यों के युवाओं से संवाद किया। उन्होंने युवाओं को उच्च शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में जाने के लिए प्रेरित करते हुए नशे से दूर रहने का आह्वान किया। आदिवासी संस्कृति और राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित इस ऐतिहासिक आयोजन की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित राजभवन का लोकभवन मंगलवार को देश की विविध जनजातीय संस्कृतियों के अनूठे संगम का साक्षी बना। अवसर था नेहरू युवा केंद्र संगठन और गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित "आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम" का, जहाँ राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने देश के विभिन्न कोनों से आए युवाओं के साथ सीधा संवाद कर उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान किया। राज्यपाल ने इस संवाद के दौरान आदिवासी समाज की प्रगति के लिए शिक्षा को एकमात्र सशक्त माध्यम बताते हुए युवाओं में एक नया जोश भर दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आदिवासी युवाओं को केवल स्नातक तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उच्च शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत उन्हें संघ लोक सेवा आयोग और अन्य प्रतिष्ठित उच्च सेवाओं की परीक्षाओं में बैठने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब समाज का युवा वर्ग उच्च प्रशासनिक पदों पर आसीन होगा, तभी संपूर्ण आदिवासी समाज का तेजी से विकास सुनिश्चित हो सकेगा। राज्यपाल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो व्यवसाय और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना दुष्कर नहीं है।
नैतिक मूल्यों और स्वास्थ्य पर बल देते हुए राज्यपाल ने उपस्थित युवाओं को नशे और हर प्रकार के व्यसन से दूर रहने की कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने मार्मिक लहजे में कहा कि नशा न केवल शरीर को खोखला करता है, बल्कि व्यक्ति की मानसिक क्षमता और भविष्य की संभावनाओं का भी समूल नाश कर देता है। भारत की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए श्री बागडे ने कहा कि हमारी संस्कृति विश्व की प्राचीनतम है, जो विविधताओं को समेटे हुए भी अटूट एकता के सूत्र में पिरोई हुई है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरियों के बावजूद हमारी श्रद्धा और भक्ति एक है, जो भारत को एक अखंड राष्ट्र बनाती है।
कार्यक्रम के दौरान ओडिसा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों से आए युवा प्रतिभागियों ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की। बिहार, झारखंड और ओडिसा के युवाओं ने मंच पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार इस आदान-प्रदान कार्यक्रम ने उनकी सोच के दायरे को विस्तृत किया है। रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोकभवन को आदिवासी कला की जीवंत छटा से सरोकार करा दिया। राज्यपाल ने इन मेधावी युवाओं की प्रतिभा की सराहना करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया। यह आयोजन न केवल एक संवाद था, बल्कि देश के सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को जयपुर की धरती से एक उज्ज्वल और सशक्त भविष्य की ओर अग्रसर होने का प्रेरक संदेश भी था।

Pratahkal Bureau
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