जयपुर में गूंजी "जल, जंगल, जमीन" की हुंकार: आदिवासी युवाओं ने निहारा आमेर का वैभव, सेना के कैंप में सीखा राष्ट्रभक्ति का कड़ा पाठ
जयपुर में आयोजित 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के दौरान आदिवासी युवाओं ने आमेर फोर्ट और जलमहल के ऐतिहासिक वैभव को जाना। आर.ए.एफ. कमांडेंट कुलदीप जैन और राज्य निदेशक कृष्ण लाल की मौजूदगी में युवाओं ने नक्सलवाद के खिलाफ जागरूकता और राष्ट्र निर्माण का संकल्प लिया। सैन्य प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से एकता और देशसेवा के जज्बे को प्रदर्शित करती यह विशेष रिपोर्ट।

जयपुर। राजस्थान की गुलाबी नगरी के ऐतिहासिक वैभव और सैन्य पराक्रम के बीच आज एक नया अध्याय तब लिखा गया, जब "जल, जंगल और जमीन" के संरक्षक आदिवासी युवाओं की टोली ने आमेर की प्राचीर और जलमहल की लहरों में प्रदेश की समृद्ध संस्कृति का दीदार किया। गृह मंत्रालय के सौजन्य से 'माय भारत' जयपुर, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित 17वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत 21 जनवरी 2026 का दिन इन युवाओं के लिए गौरव और राष्ट्रसेवा के संकल्प का साक्षी बना। जलमहल की मानसागर झील के शांत आगोश और आमेर दुर्ग की राजपूती वास्तुकला ने इन युवाओं को अपनी ओर इस कदर आकर्षित किया कि वे इतिहास के पन्नों में जीवंत हो उठी वीरता की कहानियों से मंत्रमुग्ध नजर आए।
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पड़ाव रैपिड एक्शन फोर्स (आर.ए.एफ.) कैंप रहा, जहाँ धरतीपुत्रों ने सेना के जज्बे को करीब से महसूस किया। आर.ए.एफ. के कमांडेंट श्री कुलदीप जैन ने अपने सुकमा और बीजापुर के चुनौतीपूर्ण अनुभवों को साझा करते हुए युवाओं को नक्सलवाद के असली और भयावह चेहरे से परिचित कराया। उन्होंने भावुक और स्पष्ट शब्दों में कहा कि नक्सलवाद का बीज स्थानीय नहीं बल्कि बाहरी तत्वों द्वारा बोया जाता है, जो निर्दोष युवाओं का 'ब्रेनवाश' कर उन्हें भटकाते हैं। श्री जैन ने युवाओं का आह्वान किया कि वे शिक्षा और जागरूकता के शस्त्र से मुख्यधारा का हिस्सा बनें और राष्ट्र निर्माण में अपनी महती भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए माय भारत राजस्थान के राज्य निदेशक श्री कृष्ण लाल ने 16 जनवरी से शुरू हुए इस छह दिवसीय शिविर की गतिविधियों, प्रतियोगिताओं और भ्रमण के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस मंच का उद्देश्य दूर-दराज के आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं को आधुनिक भारत के विकास और सुरक्षा तंत्र से जोड़ना है। इसके उपरांत आर.ए.एफ. की बटालियन ने अपने शौर्य और अनुशासन का ऐसा प्रदर्शन किया कि परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। जवानों ने प्लाटून वेज, थ्री हेड, एक्सटेंडेड लाइन और सर्कुलर फॉर्मेशन जैसी जटिल युद्धाभ्यासों के माध्यम से अपनी कार्यप्रणाली समझाई। मॉक ड्रिल के दौरान जब आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज व गोलीबारी के साथ दंगा नियंत्रण का प्रदर्शन हुआ, तो युवाओं ने सुरक्षा बलों की कठिन डगर को गहराई से समझा।
शहीद वाटिका में जब सम्मान गार्ड ने शहीदों को सलामी दी, तो वातावरण राष्ट्रभक्ति के रस में डूब गया। युवाओं ने वहाँ राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने की अमर परिभाषा सीखी। दिन का समापन सांस्कृतिक रंगों की अनूठी छटा के साथ हुआ। आर.ए.एफ. की टीम ने गणेश वंदना, 'जलवा-जलवा' और जीवंत भांगड़ा नृत्य से ऊर्जा भर दी, तो वहीं आदिवासी संस्कृति की मिठास भी खूब घुली। कंधमाल उड़ीसा से तुलसी मांजी और उनकी टीम तथा कालाहांडी उड़ीसा से अनस मालिक व उनके दल ने पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि विविधता में एकता ही भारत की असली पहचान है। यह आयोजन केवल एक भ्रमण नहीं, बल्कि सुदूर अंचलों से आए इन युवाओं के मन में मुख्यधारा से जुड़ने और तिरंगे की शान बढ़ाने की एक नई लौ जला गया।

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