जयपुर में गूंजेगा राष्ट्रभक्ति का शंखनाद: अमर शहीद हेमू कालानी के बलिदान दिवस पर सिंधी समाज जुटाएगा शौर्य की गाथा
जयपुर में 21 जनवरी को अमर शहीद हेमू कालानी का बलिदान दिवस भव्य रूप में मनाया जाएगा। भारतीय सिंधु सभा और पूज्य सिंधी पंचायतों के नेतृत्व में राजापार्क, मानसरोवर और बनीपार्क समेत 40 स्थानों पर विराट हिंदू सम्मेलन और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित होंगी। संत मोनू राम, मुकेश साध और आरएसएस के अशोक शर्मा जैसे गणमान्य जन शहीद की वीरता का गुणगान करेंगे। देश की आजादी के लिए 19 वर्ष की आयु में फांसी पर चढ़ने वाले इस महानायक को पूरा शहर नमन करेगा।

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर की फिजां बुधवार, 21 जनवरी को राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर नजर आएगी। अविभाजित भारत के उस युवा क्रांतिकारी, जिसने मात्र 19 वर्ष की आयु में मातृभूमि की वेदी पर हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, उस अमर शहीद हेमू कालानी का बलिदान दिवस समूचे शहर में बेहद श्रद्धापूर्वक और भव्य रूप में मनाया जाएगा। भारतीय सिंधु सभा और विभिन्न पूज्य सिंधी पंचायतों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस स्मृति उत्सव में जयपुर के 40 से अधिक स्थानों पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाएंगे, जो न केवल सिंधी समाज बल्कि हर राष्ट्रप्रेमी के लिए गौरव का क्षण होगा।
इस आयोजन की मुख्य कड़ी बुधवार सुबह 8:30 बजे सिंधी कॉलोनी, राजापार्क स्थित शहीद हेमू कालानी पार्क में देखने को मिलेगी। यहाँ पूज्य सिंधी पंचायत, अमर लाल साहिब मण्डल और अमर शहीद हेमू कालानी सेवार्थ समिति द्वारा एक 'विराट हिंदू सम्मेलन' और बलिदान दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा। इस गरिमामयी कार्यक्रम में श्री अमरापुर दरबार के संत मोनू राम और पुरसनाराम साहब मंडल के मुकेश साध शहीद हेमू कालानी की वीरता का संगीतमय गुणगान करेंगे। राष्ट्रवाद की अलख जगाने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अशोक शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे, जो हेमू कालानी के जीवन दर्शन और उनके अदम्य साहस पर प्रकाश डालेंगे।
श्रद्धांजलि की यह लहर शहर के हर कोने तक फैली हुई है। पूज्य सिंधी पंचायत बनीपार्क के कंवर कानन पार्क में सुबह 9 बजे विशेष सभा आयोजित होगी, जबकि पूज्य सिंधी पंचायत दादी का फाटक के कार्यालय में सुबह 9:30 बजे देशभक्ति के गीतों से वीर शहीद को नमन किया जाएगा। इसके उपरांत, हीरा पथ मानसरोवर में सुबह 10:30 बजे एक भव्य कार्यक्रम के साथ इस स्मृति श्रृंखला को आगे बढ़ाया जाएगा।
शहादत के इस महापर्व की सुगबुगाहट पूर्व संध्या से ही शुरू हो गई थी। प्रताप नगर के कुंभा मार्ग स्थित पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत में साध्वी तरुणा दीदी ने भजनों और देशभक्ति गीतों के माध्यम से एक भावुक वातावरण निर्मित किया, जहाँ दीपदान के कार्यक्रम ने शहीदों की स्मृति को जीवंत कर दिया। मानसरोवर के सेक्टर 61 से 63 की पंचायतों और थड़ी मार्केट स्थित शीशमहल श्री झूलेलाल मंदिर में भी हेमू कालानी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर समाज के प्रबुद्ध जनों ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
इतिहास के झरोखे से देखें तो 23 मार्च 1923 को सख्खर (वर्तमान सिंध) में जन्मे हेमू कालानी, माता जेठी बाई और पिता पेसू मल के वह लाडले थे, जिनके रगों में बचपन से ही स्वाभिमान का रक्त दौड़ता था। 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान, ब्रिटिश सेना की सैन्य रसद को ठप करने के लिए उन्होंने जब रेल पटरी उखाड़ने का दुस्साहस किया, तब वे नियति के क्रूर हाथों पकड़े गए। जेल की कालकोठरी में असहनीय यातनाएं भी उन्हें अपने साथियों के नाम उगलवाने पर मजबूर न कर सकीं। अंततः 21 जनवरी 1943 को इस किशोर क्रांतिकारी ने फांसी के फंदे को चूम लिया। आज जयपुर की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब इसी बात का प्रमाण है कि राष्ट्र के लिए सर्वस्व अर्पण करने वाले महानायक समय की धूल में कभी ओझल नहीं होते।

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