राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जयंती का भव्य आयोजन
कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने टैगोर के राष्ट्रवाद और आदर्शों पर प्रकाश डाला, साथ ही विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया।

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित टैगोर जयंती कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. आनंद भालेराव (सफेद कुर्ते में) अन्य अधिकारियों के साथ गुरुदेव के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें उनके कालजयी विचारों और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने सभा को संबोधित करते हुए गुरुदेव के राष्ट्रवाद को मानवता, संस्कृति और आत्मसम्मान की त्रिवेणी बताया। प्रो. भालेराव ने बल देकर कहा कि यदि भारत को सशक्त बनाना है, तो हमें प्रांत, भाषा एवं क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता को स्थापित करना होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में है, जबकि उसकी आत्मा उसकी एकता में निहित है।
कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने गुरुदेव के अदम्य साहस और नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए वर्ष 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड का स्मरण किया। उन्होंने बताया कि इस वीभत्स घटना के विरोध में टैगोर ने ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदत्त ‘नाइटहुड’ की उपाधि यह कहते हुए लौटा दी थी कि जब देशवासी अपमानित और पीड़ित हों, तब किसी व्यक्तिगत सम्मान को धारण करना नैतिक रूप से उचित नहीं है। प्रो. भालेराव ने टैगोर को विज्ञान और आधुनिक चिंतन का प्रबल समर्थक बताते हुए अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ उनके ऐतिहासिक संवाद का उल्लेख किया, जो ब्रह्माण्ड, सत्य एवं मानव चेतना जैसे गूढ़ विषयों पर आधारित था। एक कवि और वैज्ञानिक के मध्य यह विमर्श टैगोर की व्यापक एवं दूरदर्शी सोच का प्रमाण है। वे परंपरा के संवाहक होने के साथ-साथ आधुनिकता के भी पक्षधर थे, जिन्होंने बंगाल के गाँवों में कृषि, कुटीर उद्योग एवं सामुदायिक विकास के माध्यम से ग्रामीण पुनर्निर्माण की दिशा में गंभीर कार्य किए।
आयोजन का शुभारंभ कुलपति के स्वागत एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके उपरांत बंगाल के गणमान्य व्यक्तियों के वीडियो संदेश प्रदर्शित किए गए। इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में रवींद्र नृत्य, कविता पाठ, ‘बंगाल बी-ऑन्ड टाइम’, पदावली एवं गौड़ीय नृत्य, बॉलीवुड नृत्य, बैंड प्रस्तुति, लोक नृत्य, मलयालम लोकगीत, नृत्य-नाट्य, वंदे मातरम् एवं रैंप वॉक जैसी आकर्षक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इससे पूर्व, प्रातःकाल ‘प्रभात फेरी’ का आयोजन किया गया, जो गुरुदेव के शाश्वत आदर्शों, रचनात्मक विरासत और सांस्कृतिक सद्भाव की भावना को प्रतिबिंबित कर रही थी। इस भव्य एवं दिव्य समारोह में विश्वविद्यालय के समस्त शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारीगण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के गौरवमयी स्वर के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह में राष्ट्रभक्ति का संचार किया।

Pratahkal Bureau
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