भारतीय आध्यात्मिक जगत में संतों की परंपरा सदैव ही लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त करती रही है। इसी गौरवमयी परंपरा के संवाहक, प्रेम प्रकाश पंथ के संस्थापक और युगपुरुष आचार्याधीश ब्रह्मलीन सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज का पुण्य तिथि महानिर्वाणोत्सव 20 जून 2026 को श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। एक महान समाज सुधारक और मानवता के उपासक के रूप में विख्यात स्वामी जी महाराज ने अपने तप, त्याग और प्रेम के दिव्य संदेश से न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर असंख्य हृदयों को आलोकित किया है। उनका जीवन और उनके उपदेश आज भी समाज को जाति, धर्म और संकीर्णताओं से ऊपर उठकर आत्मीयता एवं भाईचारे के सूत्र में पिरोने की प्रेरणा देते हैं।

स्वामी जी ने संसार की नश्वरता और आत्मतत्त्व की वास्तविकता का बोध कराते हुए जनमानस को सदैव जागृत रखा। उन्होंने अपने उपदेशों में स्पष्ट किया कि भौतिक सुख-सुविधाएं अस्थायी हैं और वास्तविक शांति केवल प्रभु भक्ति तथा निस्वार्थ सेवा में ही निहित है। उनकी आध्यात्मिक वाणी का सार ‘प्रेम प्रकाश’ नामक विशाल ग्रंथ में संकलित है, जो आज भी साधकों के लिए मार्गदर्शक दीपक की भांति कार्य करता है। स्वामी जी द्वारा प्रतिपादित प्रेम प्रकाश मंडल आज देश-विदेश में अपनी शाखाओं के माध्यम से संत सेवा, गौ सेवा, शिक्षा और मानव कल्याण के कार्य निरंतर संचालित कर रहा है। यह पुण्य तिथि न केवल उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, बल्कि उनके द्वारा दिखाए गए प्रेम और करुणा के मार्ग पर पुनः चलने का संकल्प लेने का भी दिन है। उनके जीवन के आदर्श आज भी समाज के लिए एक उज्ज्वल उदाहरण बने हुए हैं।

Pratahkal Newsroom

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