जयपुर में सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 140वें जन्मोत्सव का शुभारंभ, 140 दीपों की दिव्य महाआरती बनी आकर्षण
जयपुर के श्री अमरापुर स्थान पर सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 140वें जन्मोत्सव की शुरुआत हवन, गीता पाठ और 140 दीपों की दिव्य महाआरती के साथ हुई।

जयपुर स्थित श्री अमरापुर स्थान में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हवन कुंड के पास बैठकर आहुति देते संत-महात्मा और श्रद्धालु।
जयपुर स्थित श्री अमरापुर स्थान में सनातन धर्म प्रचारक 1008 युगपुरुष आचार्य श्री सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के पावन 140वें पंचदिवसीय जन्मोत्सव का शुभारंभ हवन-यज्ञ अनुष्ठान, श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ तथा श्रीमद्भगवत गीता के पाठों के विधिवत पूजन के साथ हुआ। दो दिवसीय प्रवास पर पधारे हाजरा हजूर पूज्य गुरुदेव सतगुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज की ओजस्वी वाणी से सुबह और शाम श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हुए। जन्मोत्सव के विशेष कार्यक्रम के तहत सायंकाल 140 एकरूप थालियों और समान वेशभूषा में सुसज्जित 140 माताओं एवं पुरुषों ने भव्य महाआरती में भाग लिया, जिसमें अनेक संत-महात्मा और गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।
बुधवार, 15 जुलाई की पावन वेला में आचार्य श्री सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 140वें जन्मोत्सव का शुभारंभ प्रातः 6 बजे 40 मिनट के यज्ञ अनुष्ठान के साथ हुआ। जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में 40 दिनों तक चलने वाले हवन में प्रतिदिन 40 मिनट तक मंत्रोच्चारण के बीच यज्ञ की पावन अग्नि में संत-महात्माओं के सान्निध्य में 40 जोड़ों, भक्तों और मंडलियों द्वारा आहुतियां दी जा रही हैं। आध्यात्मिक चेतना का संदेश देने वाले श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ साहिब और श्रीमद्भगवत गीता के पाठों के विधिवत पूजन के साथ पंचदिवसीय जन्मोत्सव का मंगलारंभ किया गया।
जन्मोत्सव के प्रथम दिवस सायंकाल आयोजित विशाल महाआरती समारोह विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। प्रेम प्रकाश मंडलाध्यक्ष पूज्य गुरुदेव सतगुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज तथा पूज्य संत-महात्माओं की पावन उपस्थिति में 140 श्रद्धालुओं ने समान वेशभूषा धारण कर एक जैसी सुसज्जित थालियों से सामूहिक आरती की। इस दिव्य और अलौकिक दृश्य से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया और भक्ति का महासंगम देखने को मिला।
140वें जन्मोत्सव के अवसर पर दो दिवसीय प्रवास पर पधारे हाजरा हजूर पूज्य गुरुदेव सतगुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज ने अपनी अमृतवाणी में कहा कि आचार्य श्री सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज द्वारा रचित श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ ज्ञान का अटूट भंडार और आध्यात्मिक चेतना का अमृत स्रोत है। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धालु श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ से शिक्षा ग्रहण कर अपने मन को सतगुरु के चरणों में लगाएंगे तो निश्चय ही उनका कल्याण होगा।
श्री अमरापुर स्थान, जयपुर में प्रारंभ हुआ यह पंचदिवसीय 140वां जन्मोत्सव हवन-यज्ञ, धार्मिक अनुष्ठानों, श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ और श्रीमद्भगवत गीता के पाठ, संत-महात्माओं के सान्निध्य तथा 140 दीपों और एकरूप वेशभूषा में आयोजित महाआरती के माध्यम से श्रद्धा, आध्यात्मिक चेतना और सामूहिक भक्ति का केंद्र बना हुआ है।

Pratahkal Bureau
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