सुरेश वाडकर लाइव: जयपुर में गूंजे सदाबहार गीत, पंडित तरुण सम्मानित
कार्यक्रम में सुरेश और पद्मा वाडकर ने सुरीली जुगलबंदी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, साथ ही कला और समाज सेवा के लिए हस्तियों को सम्मानित किया गया।

जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में सृजन द स्पार्क द्वारा संगीत संध्या का आयोजन किया गया।
जयपुर में 18 अक्टूबर की शाम सदाबहार गीतों और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों से सुरमयी हो गई। सृजन द स्पार्क की ओर से बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित ‘सुरेश वाडेकर लाइव’ कार्यक्रम में मशहूर पार्श्व गायक सुरेश वाडकर और प्रसिद्ध गायिका पद्मा वाडकर की जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में संतूर वादक पद्मश्री पंडित तरुण भट्टाचार्य को नोलखा सृजन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, जबकि स्वर्गीय प्रकाश चंद सुराणा को मरणोपरांत सृजन ज्ञान अवॉर्ड प्रदान किया गया।
‘मैं ही मैं हूं, दूसरा कोई नहीं’, ‘देर ना हो जाये कहीं देर ना हो जाए’, ‘सीने में जलन, आंखों में तूफान सा क्यों है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है’ और ‘मेघा रे मेघा रे मत परदेश जा रे’ जैसे सदाबहार नग्मों की प्रस्तुतियों ने शाम को संगीतमय बना दिया। सुरेश वाडकर और पद्मा वाडकर ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों और सुरीली जुगलबंदी से संगीत प्रेमियों को यादगार अनुभव दिया।
कार्यक्रम में सृजन द स्पार्क के संस्थापक एवं मुख्य संरक्षक, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी प्रसन्न खमेसरा, चेयरमैन राजेश नौलखा, अध्यक्ष सम्प्रति सिंघवी और महासचिव राजीव सिंघवी ने प्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर, गायिका पद्मा वाडकर तथा संतूर वादक पद्मश्री पंडित तरुण भट्टाचार्य का स्वागत एवं सम्मान किया। इस अवसर पर संगीत, कला और समाज के प्रति उनके योगदान की सराहना की गई।
कार्यक्रम के दौरान एमजीपीएस स्कूल की 10 छात्राओं ने शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में भारतीय कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा की झलक देखने को मिली। इसके साथ ही संगीत और समाज के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया।
प्रसिद्ध संतूर वादक एवं पद्मश्री से सम्मानित पंडित तरुण भट्टाचार्य को संगीत के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए नोलखा सृजन अवॉर्ड प्रदान किया गया। वहीं, स्वर्गीय ज्ञान चंद जी दद्दा की स्मृति में शुरू किए गए सृजन ज्ञान अवॉर्ड के तहत इस वर्ष स्वर्गीय प्रकाश चंद सुराणा को मरणोपरांत सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी ने यह अवॉर्ड ग्रहण किया। सुराणा को उद्यमिता के माध्यम से समाज सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए यह सम्मान दिया गया।
कार्यक्रम में संगठन के प्रतिनिधियों ने भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत को सहेजने, कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने और समाज के लिए प्रेरणादायी कार्य करने वाली हस्तियों को सम्मानित करने के महत्व पर जोर दिया। सृजन द स्पार्क के भारत में 12 और विदेशों में 3 चैप्टर हैं। ये चैप्टर संगीत के माध्यम से लोगों को जोड़ने और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहे हैं।

