सुनंदा शर्मा की गायकी से जयपुर में सजी 'अनहद' शास्त्रीय संगीत की छठी कड़ी
बनारस घराने की प्रख्यात गायिका ने राग पूरिया कल्याण और खंबावती के साथ चैती व ठुमरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

जयपुर के जवाहर कला केंद्र में आयोजित 'अनहद' संगीत श्रृंखला के दौरान बनारस घराने की प्रख्यात गायिका सुनंदा शर्मा गायन प्रस्तुत करती हुईं।
“अनहद” संगीत श्रृंखला की छठी कड़ी में जयपुर की राजधानी में शनिवार शाम शास्त्रीय संगीत की सुरमयी महफिल सजी।
आयोजन का विवरण
- प्रस्तुति: बनारस घराने की प्रख्यात गायिका सुनंदा शर्मा।
- संयुक्त तत्वावधान: पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्यरत संस्था स्पिक मैक।
- स्थल सहयोगी: जवाहर कला केंद्र।
रागों का सुरमयी सफर
कार्यक्रम का शुभारंभ राग पूरिया कल्याण से हुआ। सुनंदा शर्मा ने विलंबित लय में आलाप प्रस्तुत करते हुए संध्याकालीन वातावरण को भक्ति और गंभीरता से भर दिया। स्वर विस्तार और तानों की सधी हुई प्रस्तुति ने श्रोताओं को आरंभ से ही बांधे रखा।
इसके बाद राग खंबावती की प्रस्तुति दी गई। खमाज थाट से संबंधित इस राग में श्रृंगार और विरह के भावों का सुंदर संगम देखने को मिला। गायिका ने राग की प्रकृति के अनुरूप भावों का संतुलित संप्रेषण किया, जिस पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
होली का उल्लास और भक्ति रंग
शास्त्रीय बंदिशों के उपरांत प्रस्तुति में होली का उल्लास झलका। सुनंदा शर्मा ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और निम्नलिखित रचनाएं प्रस्तुत कीं:
- ठुमरी: “होली खेलो मोसे नंदलाल”
- राग बहार में टप्पा: “गुलशन में बुलबुल चहकी”
- चैति: “रात हम देखली सपनवा हो रामा”
- दादरा: “शाम तोहे नजरिया ना लागे”
- मीरा बाई का भजन: “तुम सुनो दयाल म्हारी”
इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भक्ति और उत्सव के रंगों से सराबोर कर दिया।
संगतकार और समापन
हारमोनियम पर पंडित विनय मिश्र और तबले पर पंडित शुभ महाराज की संगत ने प्रस्तुति को सशक्त आधार दिया। लय-ताल का संतुलन और कलाकारों के बीच बेहतर सामंजस्य कार्यक्रम की विशेषता रहा।
समापन पर श्रोताओं ने तालियों की गूंज के साथ कलाकारों का अभिनंदन किया। “रंगायन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कला प्रेमी एवं पर्यटन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।”
श्रृंखला की यह कड़ी जयपुर के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक यादगार संध्या के रूप में दर्ज हुई।

Pratahkal Bureau
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