जयपुर की गुलाबी नगरी में स्थित श्री अमरापुर स्थान पर प्रेम प्रकाश मंडलाचार्य आचार्य श्री सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज का 84वां महानिर्वाण उत्सव अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ और श्रीमद्भागवत गीता जी के पाठों का भोग परायण किया गया, जिसके उपरांत आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु दरबार में शीश नवाकर प्रसाद ग्रहण किया। इस चार दिवसीय आयोजन में जन्म जयंती, मासिक चौथ पर्व, पुण्य तिथि और चालीहा महोत्सव का एक अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल हवन-यज्ञ के साथ हुई, जिसके बाद संतों और महात्माओं ने सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज की महिमा का गुणगान किया। स्वामी मोहन लाल जी महाराज, भगत जीतूराम जी, पुंडरीक शास्त्री जी सहित अन्य संतों ने स्वामी जी द्वारा रचित आध्यात्मिक वाणियों, दोहों और भजनों की संगीतमय प्रस्तुति दी। सत्संग के दौरान स्वामी मोहन लाल जी ने संतों के जीवन को परोपकार का पर्याय बताते हुए कहा कि सदगुरु का जीवन निस्वार्थ सेवा और समभाव का संदेश देता है।

महानिर्वाण उत्सव के उपलक्ष्य में श्री अमरापुर नवयुवक मंडल द्वारा एक रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए 52 यूनिट रक्त एकत्रित किया। इसके अतिरिक्त, सेवा संकल्प के तहत कुष्ठ आश्रमों में भोजन सेवा और राहगीरों के लिए शर्बत व छाछ वितरण का कार्य भी किया गया। गुरु समाधि स्थल को विशेष रूप से पुष्पों से अलंकृत किया गया था। सायंकाल में ब्रह्म दर्शनी का पाठ हुआ और दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। श्री अमरापुर स्थान पर चल रहे चालीहा महोत्सव का विधिवत समापन 19 जुलाई को स्वामी टेऊँराम जयंती के अवसर पर होगा।

Pratahkal Newsroom

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