जयपुर में मधु क्रांति का शंखनाद: मंजू राजपाल ने बताया कैसे शहद की मिठास बदलेगी किसानों की तकदीर
जयपुर में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार में प्रमुख शासन सचिव श्रीमती मंजू राजपाल ने मधुमक्खी पालन को किसानों की आय दोगुनी करने का रामबाण बताया। भरतपुर और टोंक में स्थापित हो रहे उत्कृष्टता केंद्रों और मधु क्रांति पोर्टल के माध्यम से राजस्थान अब शहद उत्पादन में देश का नेतृत्व करने की तैयारी में है। जानिए कैसे आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रशिक्षण से बदलेगी प्रदेश के किसानों की किस्मत।

जयपुर, 23 जनवरी। गुलाबी नगरी के दुर्गापुरा स्थित कृषि प्रबंध संस्थान में शुक्रवार को एक ऐसी चर्चा का आगाज़ हुआ, जो राजस्थान के कृषि परिदृश्य में सुनहरे अध्याय लिखने का सामर्थ्य रखती है। प्रदेश के किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि करने और कृषि को टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय मधुमक्खी पालन सेमिनार का भव्य शुभारंभ हुआ। इस गरिमामय समारोह की अध्यक्षता करते हुए कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती मंजू राजपाल ने स्पष्ट किया कि मधुमक्खी पालन केवल एक सहायक व्यवसाय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने वाला एक सशक्त और रोजगारोन्मुख आधार है।
श्रीमती राजपाल ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में इस बात पर गहरा प्रकाश डाला कि मधुमक्खी पालन प्राकृतिक संतुलन और आर्थिक समृद्धि का एक अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में शहद के साथ-साथ मधुमोम, रॉयल जेली, परागकण और प्रोपोलिस जैसे उत्पादों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। ये उत्पाद न केवल पोषण के प्रहरी हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में किसानों के लिए आय के नए द्वार खोल रहे हैं। उन्होंने युवाओं और प्रगतिशील किसानों का आह्वान किया कि वे सरकार द्वारा संचालित लाभकारी योजनाओं का भरपूर लाभ उठाएं और इस क्षेत्र में नवाचार करें।
सेमिनार के दौरान श्रीमती राजपाल ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि राजस्थान सरसों उत्पादन में देश का सिरमौर है, किंतु शहद उत्पादन में वर्तमान में पांचवें स्थान पर खड़ा है। उन्होंने इस अंतर को पाटने के लिए किसानों और मधुमक्खी पालकों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता जताई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि आपसी सहयोग बढ़ता है, तो राजस्थान जल्द ही शहद उत्पादन में भी देश का नेतृत्व करेगा। इस दिशा में सरकार की गंभीरता को रेखांकित करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि भरतपुर और टोंक जिलों में मधुमक्खी पालन के उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। ये केंद्र वैज्ञानिकों और किसानों के बीच की कड़ी बनेंगे, जहाँ आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और जटिल समस्याओं का समाधान एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगा।
महिलाओं की भागीदारी पर विशेष जोर देते हुए प्रमुख शासन सचिव ने स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को इस मुहिम से जोड़ने की बात कही। उन्होंने पारदर्शिता और सुव्यवस्थित प्रबंधन के लिए सभी पालकों से ‘मधु क्रांति पोर्टल’ पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराने का आग्रह किया। सेमिनार के विभिन्न तकनीकी सत्रों में कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने मधुमक्खी रोग प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां, आधुनिक बॉक्स प्रणाली और शहद की ब्रांडिंग जैसे सूक्ष्म पहलुओं पर विस्तार से विमर्श किया। इस राज्य स्तरीय आयोजन में प्रदेश भर से आए प्रगतिशील किसानों, उद्यमियों और विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजस्थान अब एक नई 'मीठी क्रांति' की ओर कदम बढ़ा चुका है, जो आने वाले समय में न केवल पर्यावरण का संरक्षण करेगी बल्कि किसान के घर में समृद्धि की मिठास भी घोलेगी।

Pratahkal Bureau
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