वांगचुक मामले पर मदन राठौड़ का कांग्रेस पर हमला, बोले- जीवन बचाना सरकार की प्राथमिकता
सोनम वांगचुक मामले और राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।

तस्वीर में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ मीडिया से बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने सोनम वांगचुक मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी का स्वास्थ्य बिगड़ने का इंतजार करना और बाद में उस पर राजनीति करना कांग्रेस की विकृत मानसिकता को दर्शाता है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक के जीवन की रक्षा करना होती है। किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य बिगड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाना पूरी तरह उचित निर्णय है। उन्होंने कहा कि किसी की जान पर राजनीति करना सही नहीं है और यह विकृत मानसिकता का परिचायक है।
मदन राठौड़ ने कहा कि कुछ लोग चाहते थे कि वांगचुक का स्वास्थ्य और बिगड़ जाए, ताकि बाद में सरकार को घेरकर राजनीतिक लाभ लिया जा सके। उन्होंने कहा कि आमरण अनशन जैसा कदम उठाने से पहले गंभीरता से विचार करना चाहिए। किसी भी मांग को लेकर चर्चा और बहस लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी व्यक्ति का जीवन सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी उद्देश्य से सरकार ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि जब हम मराठी के साथ जर्मन, फ्रैंच और इटेलियन जैसी भाषाएं पढ़ाने के लिए तैयार हैं, तो राजस्थानी भाषा को पढ़ाने में कोई दिक्कत नहीं है।
उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए इसे एक भाषा के तौर पर स्थापित करना होगा। इसके लिए भाषाविदों को विभिन्न बोलियों को लेकर व्यापक सहमति बनानी होगी। मदन राठौड़ ने कहा कि मेवाड़ी, मारवाड़ी सहित अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों और बोलियों में अंतर है। यदि भाषाविद् इन्हें एक स्वरूप देने की दिशा में कार्य करें तो राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने में आसानी होगी।
भाषा के मुद्दे पर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रही, लेकिन उस दौरान राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने केवल दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने का काम किया है, जबकि भाजपा राजस्थानी भाषा के सम्मान और उसकी मान्यता के लिए प्रयासरत है।

