जयपुर, 12 जनवरी। राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में आज महिला सशक्तिकरण और हरित ऊर्जा के संगम का एक ऐतिहासिक अध्याय शुरू हुआ। ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को तकनीक की शक्ति से लैस करने के उद्देश्य से बेयर फुट कॉलेज में सोमवार को महत्वाकांक्षी “सोलर दीदी” प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह पहल केवल एक कौशल विकास कार्यक्रम मात्र नहीं है, बल्कि सुदूर गांवों में स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाने का एक सशक्त शंखनाद है।

इस विशेष अभियान के पहले चरण में सिल्होरा ब्लॉक की 30 जांबाज महिलाओं का चयन किया गया है, जो स्वयं सहायता समूह (SHG) के नेटवर्क से जुड़ी हैं। निर्धारित मानकों पर खरी उतरने वाली इन महिलाओं को आवासीय प्रशिक्षण के लिए कॉलेज परिसर में नामांकित किया गया है, जहां वे आने वाले दिनों में पारंपरिक चूल्हे-चौके की सीमाओं को लांघकर सौर ऊर्जा की बारीकियों को आत्मसात करेंगी। यह कार्यक्रम ग्रामीण भारत में महिला नेतृत्व वाली स्थानीय सेवा वितरण प्रणालियों को मजबूती प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

प्रशिक्षण की रूपरेखा को अत्यंत व्यापक और वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है। 40 दिनों तक चलने वाले इस सघन मॉड्यूल में महिलाओं को सौर ऊर्जा के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षता भी प्रदान की जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान ये प्रतिभागी सोलर पैनल की असेंबली, उनके इंस्टॉलेशन की तकनीक, सौर उपकरणों का रखरखाव और जटिल तकनीकी समस्याओं (ट्रबलशूटिंग) को सुलझाने का हुनर सीखेंगी। इसके अतिरिक्त, उन्हें सामुदायिक स्तर पर सौर प्रणालियों के प्रबंधन का कौशल भी सिखाया जा रहा है, ताकि वे अपने क्षेत्र में आत्मनिर्भर तकनीकी विशेषज्ञ बन सकें।

प्रशिक्षण के इस सफर का समापन 40वें दिन एक औपचारिक मूल्यांकन के साथ होगा। इस परीक्षा में अपनी दक्षता सिद्ध करने वाली सफल महिलाओं को संस्थान द्वारा आधिकारिक रूप से “सोलर दीदी” के प्रमाण पत्र से नवाजा जाएगा। यह प्रमाण पत्र न केवल उनकी योग्यता का प्रतीक होगा, बल्कि उनके लिए हरित कौशल आधारित आजीविका के नए द्वार भी खोलेगा।

सिल्होरा ब्लॉक से तैयार होने वाला यह “सोलर दीदियों” का विशेष कैडर भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा संकट के समाधान के लिए एक रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करेगा। इस कार्यक्रम का दूरगामी प्रभाव न केवल पर्यावरण संरक्षण में दिखेगा, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को 'टेक्नो-आंत्रप्रेन्योर' (तकनीकी उद्यमी) के रूप में स्थापित कर स्थानीय स्तर पर विश्वसनीय और सतत ऊर्जा समाधान सुनिश्चित करेगा। यह नवाचार सिद्ध करता है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही प्रशिक्षण और अवसर मिले, तो वे तकनीक के क्षेत्र में भी दुनिया को नई राह दिखा सकती हैं।

Pratahkal Newsroom

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