सिंधी व्यंजन प्रतियोगिता में दिखी संस्कृति की खुशबू, 33 प्रतिभागियों ने बिखेरा स्वाद
जयपुर के जवाहर नगर में सिंधी सेंट्रल एसोसिएशन की व्यंजन प्रतियोगिता में 33 प्रतिभागियों ने पारंपरिक सिंधी व्यंजन प्रस्तुत किए। दाल पकवान, सिंधी थाली और मिठाइयों ने आयोजन में सांस्कृतिक रंग बिखेरे।

तस्वीर में जयपुर के जवाहर नगर में आयोजित पारंपरिक सिंधी व्यंजन प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागी और निर्णायक नजर आ रहे हैं।
जयपुर, 3 अगस्त 2026। सिंधी समाज की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करने के उद्देश्य से जवाहर नगर स्थित सिंधी सेंट्रल एसोसिएशन एवं मातृ शक्ति टीम के संयुक्त तत्वावधान में पारंपरिक सिंधी व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में 33 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर सिंधी पाक-कला की समृद्ध परंपरा और पारंपरिक व्यंजनों को प्रस्तुत किया।
सिंधी सेंट्रल एसोसिएशन के अध्यक्ष रतन ऐलानी ने बताया कि किसी भी समाज की पहचान केवल उसकी भाषा, वेशभूषा और परंपराओं से नहीं होती, बल्कि उसके खान-पान में भी उसकी संस्कृति, इतिहास, संस्कार और जीवनशैली की झलक दिखाई देती है। इसी उद्देश्य से आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने सिंधी नाश्ते, मुख्य भोजन और मिठाइयों की विभिन्न पारंपरिक एवं स्वादिष्ट श्रेणियां प्रस्तुत कीं।
प्रतियोगिता में दाल पकवान, मिर्च पकोड़ा, दाल छोला डबल, डोडो चटनी, सिंधी थाली, तहरी, खुराक, मोहन थाल, माजून सहित कई पारंपरिक व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे। निर्णायक सोनिया गिडवाणी, वर्षा छतानी एवं मोहन नानकानी ने व्यंजनों का स्वाद, पारंपरिक स्वरूप, प्रस्तुति, स्वच्छता और पौष्टिकता के आधार पर मूल्यांकन किया।
संयोजिका चंचल लक्खी ने बताया कि प्रतियोगिता के परिणामों में नाश्ता श्रेणी में हर्षिता कालरा एवं रिद्धि कालरा को दाल-पकवान एवं मिर्च पकोड़ा के लिए प्रथम पुरस्कार दिया गया। जिया जयचंदानी को दाल-पकवान के लिए द्वितीय तथा कविता झूरानी को दाल छोला डबल के लिए तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
भोजन श्रेणी में रिचा सुखानी को व्रत की थाली के लिए प्रथम, कविता झूरानी को सवांजड़ो एवं थूम वारो डोडो के लिए द्वितीय तथा भव्या वाधवाणी को सिंधी थाली के लिए तृतीय पुरस्कार मिला। मिठाई श्रेणी में दिशा तलरेजा को खुराक एवं तहरी के लिए प्रथम, नम्रता खत्री को मोहन थाल के लिए द्वितीय तथा मोनिका केसवानी को माजून के लिए तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
तुलसी संगतानी ने कहा कि सिंधी समाज ने विभाजन के बाद बहुत कुछ खोया, लेकिन अपनी भाषा, आस्था और पारंपरिक व्यंजनों की विरासत को आज तक सुरक्षित रखा है। उन्होंने कहा कि सिंधी भोजन समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार है। पारंपरिक व्यंजन केवल स्वाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे परिवार, संस्कार और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को जोड़ने का माध्यम भी हैं।
महासचिव विजय धनवानी ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और फास्ट फूड के बढ़ते प्रभाव के कारण नई पीढ़ी पारंपरिक व्यंजनों से दूर होती जा रही है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से पाक-कला का प्रदर्शन करने के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य होता है। इससे युवाओं और बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित होती है तथा मातृशक्ति को अपनी पारंपरिक पाक-कला दिखाने का मंच मिलता है।
कोषाध्यक्ष एम एम मोरवानी ने बताया कि साईं मुकेश साध ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने भाग लेकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। अंत में विजेताओं को सम्मानित किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
इस अवसर पर समाज के मोहन कर्मचंदानी, हीरा खत्री, मोहन तलरेजा, नरेंद्र लक्खी, सुरेश जयचंदानी, प्रदीप मेठवाणी, मनोहर राजानी, सन्नी वरदानी, वाशी थावाणी, रमेश हरपलानी, गणेश राजपाल, राजकुमार खटवानी, जयकिशन टेकचंदानी, दीपक भक्तियानी, राजकुमार साध, गोरधन कालरा, पुरुषोत्तम रामरख्यानी, गिरीश लालवानी, नरेश छतानी एवं नारायण चंदनानी उपस्थित रहे।
मातृ शक्ति टीम में गीतांजली ऐलानी, रेशमा राजानी, पुष्पा खत्री, कशिश वरदानी, संगीता धनवानी एवं निम्मी थावानी ने प्रतियोगिता के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन के माध्यम से सिंधी समाज की पारंपरिक पाक-कला और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

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