विश्वभर के वैज्ञानिकों का यह स्पष्ट मत है कि मातृभाषा ही सृजनशीलता की जननी है और इसी विचार को आत्मसात करते हुए भारतीय सिन्धु सभा राजस्थान न्यास एवं भारतीय सिन्धु सभा महानगर के संयुक्त तत्वावधान में जयपुर के पाथेय भवन में 'सिन्धी भाषा मान्यता दिवस' पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित क्षेत्रीय संघ चालक एवं सम्पर्क अधिकारी डॉ. रमेशचन्द अग्रवाल ने समाज का आह्वान किया कि वे भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्राथमिक शिक्षण मातृभाषा में सुनिश्चित करें, परिवारों में सिन्धी में संवाद करें, हस्ताक्षर अपनी भाषा में करें और आगामी जनगणना में अपनी मातृभाषा के रूप में 'सिन्धी' ही अंकित करवाएं। डॉ. अग्रवाल ने सांस्कृतिक चेतना पर बल देते हुए कहा कि निमन्त्रण पत्रों का प्रकाशन मातृभाषा में होना चाहिए और स्वदेशी का संकल्प ही समाज को धर्मान्तरण एवं लव जिहाद जैसी विसंगतियों से सुरक्षित रख सकता है; इसके साथ ही उन्होंने नागरिक कर्तव्यों, सामाजिक समरसता, पारिवारिक मंगल मिलन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूकता का संदेश दिया।

संगोष्ठी के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष राजेश वाधवाणी ने सिन्धु घाटी सभ्यता की ऐतिहासिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि शाह, सचल और सामी के साहित्य ने सिन्धी भाषा को संवर्धित किया है। उन्होंने संविधान में सिन्धी भाषा की मान्यता के फलस्वरूप गठित राष्ट्रीय सिन्धी भाषा विकास परिषद एवं विभिन्न अकादमियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और संविधान का देवनागरी में प्रकाशन करने हेतु भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। इसी क्रम में सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने अमर शहीद सन्त कंवरराम के सेवाभावी जीवन का स्मरण करते हुए मां, मातृभूमि और मातृभाषा पर गर्व करने का आह्वान किया। तीर्थाणी ने सरकार से पुरजोर मांग की कि शीघ्र ही 'केन्द्रीय सिन्धी विश्वविद्यालय' का गठन किया जाए ताकि सिन्धी युवाओं को उच्च शिक्षा के साथ रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकें।

प्रादेशिक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए प्रदेशाध्यक्ष ईश्वर मोरवाणी ने बताया कि समस्त इकाइयों एवं सामाजिक-धार्मिक संगठनों के सहयोग से आयोजित इस संगोष्ठी में सिन्धी शिक्षा मित्रों का सम्मान किया गया है। प्रदेश संरक्षक मोहनलाल वाधवाणी ने घोषणा की कि विद्यार्थियों को भाषा से जोड़ने हेतु गठित न्यास के आगामी 11 मई को चार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 'सिन्धु धाम' के माध्यम से छात्रवास का निर्माण करवाया जाएगा, जिसमें महामण्डलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में दानदाताओं का सहयोग लिया जाएगा। महिला शक्ति की भूमिका पर बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष शोभा बंसताणी ने कहा कि बाल संस्कार शिविरों में मातृशक्ति के सक्रिय सहयोग से संगठन निरंतर सुदृढ़ हो रहा है।

धार्मिक पर्यटन के संदर्भ में सिन्धु दर्शन तीर्थ यात्रा के प्रदेश प्रभारी मूलचन्द बंसतानी ने जानकारी दी कि आगामी 5 से 8 जून तक लेह-लद्दाख यात्रा आयोजित होगी, जिसका शुभारंभ 1 जून को जम्मू से किया जाएगा। कार्यक्रम का विधिवत आरंभ आराध्यदेव झूलेलाल, सन्त कंवरराम एवं भारतमाता के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वागत भाषण विष्णु देव सामताणी ने दिया और आभार हीरालाल तोलाणी ने व्यक्त किया। सत्रों का कुशल संचालन नवलकिशोर गुरनाणी, किरण होतवाणी एवं अंजलि ज्ञानाणी ने किया। इस गरिमामयी अवसर पर राजस्थान प्रशासनिक सेवा में चयनित ऋतू भोजवाणी व नेहा भोजवाणी को शॉल एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। समारोह में कुल 153 सिन्धी शिक्षा मित्र, सिन्धी विषय में स्नातकोत्तर (MA) करने वाले 10 मेधावी छात्र एवं राष्ट्रीय सिन्धी भाषा विकास परिषद के 35 शिक्षा मित्रों का सम्मान हुआ। पुरसानाराम मण्डल के मुकेश साध ने उपस्थित जनसमूह को आशीर्वचन प्रदान किए।

संगोष्ठी के अंत में आगामी ग्रीष्मकालीन अवकाश हेतु विशेष 'सिन्धी बाल संस्कार शिविर' पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसे डॉ. प्रदीप गेहाणी एवं रमेश केवलाणी के सहयोग से प्रदेश सहमहामंत्री नवल किशोर गुरनाणी द्वारा तैयार किया गया है। आयोजन में पूज्य सिन्धी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष गिरधारी लाल मनकाणी, महामंत्री धर्मदास मोटवाणी, संरक्षक नारायणदास नाजवाणी, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. कैलाश शिवलाणी, कोषाध्यक्ष ईन्दर रामाणी सहित संभाग प्रभारी नारायण परनाणी, किशनचन्द भागवाणी, बसंत खुशलाणी, हेमनदास मोटवाणी, लखमीचन्द लालवाणी, शिव कुमार शुखनाणी, हिना सामनाणी, ललिता मंघनाणी, अनिता थावाणी, रूचिता गुरनाणी एवं विभिन्न पंचायतों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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