सिंधी समाज ने श्रद्धा और आस्था के साथ जेठ चंड का पर्व मनाते हुए भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने सार्वजनिक जलाशयों, झूलेलाल मंदिरों और अपने घरों में वृक्ष की टहनी को आटे के मोदक में स्थापित कर वरुणावतार भगवान झूलेलाल की विधिवत पूजा की तथा परिवार के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की। इस अवसर पर प्रकृति संरक्षण और जल स्रोतों के महत्व का संदेश भी दिया गया।

समाज के तुलसी संगतानी ने बताया कि जेठ चंड की पूजा सिंधी ज्येष्ठ मास के समापन पर की जाती है। इस अवसर पर भगवान झूलेलाल को ऋतु फल आम, खरबूजे, आलू बुखारे और जामुन के साथ घर में बने पुलाव, मीठी सेवइयां और छोले का भोग अर्पित किया गया। महिलाओं ने हाथ में अक्षत और चीनी लेकर अपने परिवार के कल्याण एवं सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

समाजसेवी रतन ऐलानी ने बताया कि सिंधी समाज में भगवान झूलेलाल को श्रद्धा और प्रेम के साथ विविध प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित करने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि जेठ चंड की प्रार्थना में महिलाएं बड़े स्नेह और अपनत्व के साथ भगवान से प्रार्थना करती हैं कि हमें हलवा खिलाओ, हमें सिवइयाँ खिलाओ, हमें पुलाव, रबड़ी और मालपुए का प्रसाद दो, हमें आम, आलूबुखारा और जामुन खिलाओ। उन्होंने बताया कि यह प्रार्थना केवल स्वादिष्ट व्यंजनों की कामना नहीं, बल्कि प्रभु से सुख, समृद्धि, तृप्ति और भरपूर जीवन का आशीर्वाद प्राप्त करने का मधुर भाव है।

समाज के बुजुर्ग मोहन नानकानी ने कहा कि जब मन भगवान के प्रति प्रेम और विश्वास से परिपूर्ण हो जाता है, तब भक्त अपने आराध्य को जीवन की प्रत्येक खुशी में सहभागी बनाना चाहता है। जैसे एक छोटा बालक अपने माता-पिता से स्नेहपूर्वक अपनी मनपसंद वस्तुएँ मांगता है, उसी प्रकार भक्त भी भगवान से अच्छे-अच्छे व्यंजनों की कामना करता है। उन्होंने कहा कि इस भाव के पीछे यह अटूट विश्वास है कि भगवान ही पालनहार हैं और उनकी कृपा से जीवन में अन्न, धन, स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है।

उन्होंने बताया कि इसी कारण इस प्रार्थना में विभिन्न व्यंजनों का उल्लेख अन्न की पूर्णता, आनंद, पारिवारिक सौहार्द और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं प्रार्थना करती हैं कि किसी भी घर में अन्न का अभाव न हो, सभी को स्वादिष्ट भोजन मिले, सभी स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें और जीवन सदैव उत्सव की तरह आनंदमय बना रहे। साथ ही वे अच्छी वर्षा, देश में भरपूर धन-धान्य की उत्पत्ति, जलाशयों के भरपूर रहने और नई पीढ़ी द्वारा इन त्योहारों के महत्व को समझने की कामना भी करती हैं।

Pratahkal Bureau

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