जयपुर के राजापार्क में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
भाटिया भवन में आयोजित कथा के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास सुरेश जी शास्त्री ने वाराह अवतार, राजा दक्ष यज्ञ और बाल भक्त ध्रुव के चरित्र का आध्यात्मिक विवेचन किया।

जयपुर के राजापार्क स्थित भाटिया भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते कथा व्यास सुरेश जी शास्त्री।
जयपुर, 18 मई 2026। भाटिया बिरादरी प्रबंध समिति, राजापार्क, जयपुर के तत्वावधान में भाटिया भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास सुरेश जी शास्त्री ने व्यासपीठ से ज्ञान की अमृत वर्षा करते हुए भक्तों को धर्म, भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलने का दिव्य संदेश दिया। उन्होंने अत्यंत गूढ़ रहस्य को उजागर करते हुए कहा कि जीवन में गुरु, माला और मूर्ति को कभी भी बदलना नहीं चाहिए, क्योंकि यही अडिग श्रद्धा ही ईश्वर प्राप्ति का मूल आधार बनती है।
श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के इस विशेष सत्र में कथा व्यास सुरेश जी शास्त्री ने वाराह अवतार चरित्र, दक्ष यज्ञ प्रसंग तथा बाल भक्त ध्रुव चरित्र का विस्तृत एवं आध्यात्मिक विवेचन किया। जब दैत्य हिरण्याक्ष ने संपूर्ण पृथ्वी को रसातल में ले जाकर सृष्टि के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न कर दिया था, तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने वाराह अवतार धारण कर पृथ्वी का उद्धार किया और अत्याचारी दैत्य का वध किया। शास्त्री जी ने समझाया कि जब-जब सृष्टि पर अधर्म बढ़ता है, भगवान अपने अनन्य भक्तों और चराचर जगत की रक्षा के लिए समय-समय पर विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं।
इसके पश्चात, कथा में अहंकार के विनाशकारी स्वरूप को दर्शाते राजा दक्ष यज्ञ चरित्र का मार्मिक वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि अहंकार ही मनुष्य के सर्वनाश और पतन का सबसे बड़ा कारण है। राजा दक्ष द्वारा देवाधिदेव महादेव भगवान शिव का अपमान किए जाने और माता सती द्वारा यज्ञ कुंड में आत्मदाह करने की हृदयविदारक कथा को सुनकर पूरा पांडाल भावुक हो उठा और श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। इस प्रसंग के माध्यम से भगवान शिव की असीम करुणा, क्षमाशीलता और त्याग के आदर्शों को रेखांकित किया गया।
द्वितीय दिवस की कथा का मुख्य आकर्षण बाल भक्त ध्रुव का प्रसंग रहा, जिसने उपस्थित जनमानस को झकझोर कर रख दिया। सुरेश जी शास्त्री ने प्रेरित करते हुए कहा कि मात्र पांच वर्ष की अल्पायु में ध्रुव ने सौतेली मां द्वारा किए गए अपमान को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे भगवान की भक्ति का मार्ग चुनने की शक्ति बनाया। ध्रुव की घोर एवं कठोर तपस्या से परम प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें ब्रह्मांड में अटल ध्रुव पद प्रदान किया। यह प्रसंग श्रद्धालुओं को विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ निश्चय, अखंड भक्ति और अटूट विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
कथा पांडाल निरंतर भगवान के गगनभेदी जयकारों और सुमधुर भजन-कीर्तन से गुंजायमान रहा, जिससे संपूर्ण क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और अलौकिक हो गया। इस आध्यात्मिक महोत्सव में बड़ी संख्या में स्थानीय एवं दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ अर्जित किया। आरती के पावन अवसर पर भाटिया बिरादरी प्रबंध समिति के अध्यक्ष अजय गाँधी, सूरजभान भाटिया, चंद्र भाटिया, प्रताप भाटिया और सुभाष भाटिया सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों व अनन्य भक्तों ने व्यासपीठ की सामूहिक महाआरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया। समिति के उपाध्यक्ष नितिन भाटिया (9351433000) ने आगामी रूपरेखा की आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि मंगलवार को कथा के तृतीय दिवस पर भरत चरित्र, अजामिल उपख्यान तथा नृसिंह अवतार की अलौकिक कथा का वाचन किया जाएगा।

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