श्री भाटिया बिरादरी प्रबंध समिति के तत्वावधान में आदर्श नगर स्थित भाटिया भवन में आयोजित 108 श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समारोह के पांचवें दिन गुरुवार को धर्ममय वातावरण में भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा के मुख्य आयोजक श्री भाटिया बिरादरी प्रबंध समिति के अध्यक्ष अजय गाँधी ने जानकारी देते हुए बताया कि पं. जवाहर लाल हर्ष और पं. शशि भूषण हर्ष के सानिध्य में यह आयोजन संपन्न हो रहा है।

व्यास पीठ से प्रवचन करते हुए सुरेश जी शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला जीवन को धर्म, प्रेम और भक्ति की ओर अग्रसर करने वाली दिव्य शिक्षा है। कथा के दौरान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के पश्चात गोकुल में घटित बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। शास्त्री जी ने बताया कि कन्हैया अपनी बाल सुलभ शरारतों से ब्रजवासियों का मन मोह लिया करते थे। कभी गोप बालकों के साथ खेल में मग्न होना, तो कभी माता यशोदा को अपने भोलेपन से निरुत्तर कर देना—इन लीलाओं ने उपस्थित भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।

माखन चोरी प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भगवान का माखन चुराना मात्र बाल हठ नहीं, बल्कि यह भक्तों के हृदय रूपी माखन को प्रेम के वशीभूत होकर जीत लेने का एक संदेश था। यशोदा मैया के वात्सल्य और गोपियों की शिकायतों का प्रसंग सुन श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए। दामोदर लीला का वर्णन करते हुए शास्त्री जी ने समझाया कि जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को ऊखल से बांधने का प्रयास किया, तो रस्सी बार-बार दो अंगुल कम पड़ गई। इसका आध्यात्मिक अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान प्रेम और कृपा के समर्पण से ही प्राप्त होते हैं, और अंततः माता के प्रेम के सम्मुख स्वयं भगवान को बंधना पड़ा।

वेणु गीत प्रसंग में उन्होंने श्रीकृष्ण की बांसुरी की मधुरता का अलौकिक वर्णन किया, जिसकी धुन सुनकर गोपियां, गौमाता, वृक्ष, नदी और संपूर्ण प्रकृति मंत्रमुग्ध हो जाती थी। उन्होंने संदेश दिया कि जब मनुष्य रिक्तता महसूस कर भगवान की शरण में आता है, तो प्रभु उसके जीवन को बांसुरी की भांति मधुर बना देते हैं। गिरिराज पूजा प्रसंग में इंद्र के अभिमान को खंडित करने की कथा सुनाते हुए शास्त्री जी ने उपस्थित जनों को प्रकृति एवं गौसेवा का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्रभु ने कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की। यह प्रसंग सुनते ही पूरा पांडाल 'जय श्रीकृष्ण' के उद्घोष से गूंज उठा।

कार्यक्रम के अंत में भाटिया यूथ ब्रिगेड, भाटिया लेडीज़ क्लब और भाटिया मैरिज ब्यूरो के सदस्यों ने भगवान श्रीकृष्ण की आरती कर विश्व कल्याण की प्रार्थना की। उपाध्यक्ष नितिन भाटिया और हरीश भाटिया ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को रास पंचाध्यायी, कंस वध, भ्रमर गीत और रुक्मणि विवाह की कथा का आयोजन किया जाएगा। कथा प्रतिदिन अपरान्ह 3.30 बजे से रात्रि 8.00 बजे तक अनवरत जारी रहेगी।

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