श्री प्रेम प्रकाश मंडल: सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी का जीवन और दर्शन
जानिए श्री प्रेम प्रकाश मंडल के संस्थापक स्वामी टेऊँराम जी महाराज के जीवन, उनके आध्यात्मिक संदेश और समाज सेवा के कार्यों के बारे में।

श्री प्रेम प्रकाश मंडल के संस्थापक सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज, जिन्होंने सनातन संस्कृति और जन-सेवा का दिव्य मार्ग प्रशस्त किया।
भारतीय संत परंपरा में साधना के साथ जन-सेवा को सर्वोपरि स्थान दिया गया है। इसी दिव्य मार्ग का प्रतिनिधित्व श्री प्रेम प्रकाश मंडल करता है, जो प्रेम, सेवा और सनातन संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस महान परंपरा की नींव सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज ने रखी थी। उनका जन्म 6 जुलाई 1887 को सिंधु नदी के तट पर स्थित खंडू गांव में हुआ था। बाल्यावस्था से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के स्वामी टेऊँराम जी ने मात्र 14 वर्ष की अल्पायु में अपने गुरुदेव स्वामी आसुराम जी से दीक्षा प्राप्त की। हरिद्वार में संन्यास ग्रहण करने के पश्चात उन्होंने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को अपने जीवन का ध्येय बनाया।
स्वामी टेऊँराम जी महाराज ने समाज को 'ॐ श्री सतनाम साक्षी' का पावन मंत्र प्रदान किया, जो आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। वे एक महान दार्शनिक और साहित्यकार भी थे। उनके द्वारा रचित 'श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ' लगभग 800 पृष्ठों का एक ऐसा संग्रह है, जिसमें दोहे, पद, छंद और भजनों के माध्यम से जीवन दर्शन का अद्भुत समावेश है। उनकी रचनाओं में कबीर, मीरा, सूरदास और गुरु नानक जैसे संतों की परंपरा की झलक मिलती है। उन्होंने 'श्री अमर कथा', 'यमराज नचिकेता', 'साक्षी दर्शन', 'कवितावली-छंदावली', 'प्रेम प्रकाश दोहावली', 'सोलह शिक्षाएं', 'सलोक' और 'माला शान्ति के दोहे' जैसे कालजयी ग्रंथों की रचना की। मात्र 55 वर्ष की आयु में हैदराबाद स्थित अमरापुर दरबार में उनका महानिर्वाण हुआ।
उनके पावन आदर्शों को महर्षि स्वामी सर्वानंद जी महाराज ने आगे बढ़ाया और जयपुर में 'श्री अमरापुर स्थान' की स्थापना की। तदोपरांत स्वामी शांति प्रकाश जी महाराज तथा स्वामी हरिदास राम जी ने इस आध्यात्मिक धारा को निरंतर प्रवाहित रखा। वर्तमान में स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज के कुशल नेतृत्व में संपूर्ण प्रेम प्रकाश मंडल संचालित है। आज जयपुर स्थित श्री अमरापुर स्थान इस मंडल का मुख्यालय है, जहां से विश्व भर की शाखाओं का संचालन होता है। यह संस्थान केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सेवा का महाकुंभ है, जहां अन्न प्रसाद वितरण, जल मंदिर, गौशाला, विश्राम गृह, मोक्षवाहिनी, निर्धन परिवारों को राशन और अस्पताल जैसी अनेक जनहितकारी सेवाएं निरंतर संचालित होती हैं।
सेवा ही इस संप्रदाय की मूल विशेषता है। मंडल द्वारा रक्तदान और स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन के साथ गौ-सेवा को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। वर्तमान में भारत सहित अमेरिका, स्पेन, दुबई और बैंकॉक जैसे देशों में इसकी 150 से अधिक शाखाएं सक्रिय हैं। हरिद्वार में अमरापुर घाट, स्वामी सर्वानंद घाट, प्रेम प्रकाश घाट, सतनाम साक्षी घाट, ध्यान कुंज और स्वामी टेऊँराम सेतु जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का संचालन भी श्री अमरापुर स्थान, जयपुर द्वारा किया जा रहा है। रामेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशाल घाटों का निर्माण संप्रदाय की सेवा भावना का प्रत्यक्ष प्रमाण है। भौतिकता और तनाव के इस दौर में श्री प्रेम प्रकाश मंडल मानवता को जोड़ने और प्रेम-सेवा का संदेश प्रसारित कर रहा है, जो स्वामी टेऊँराम जी महाराज द्वारा प्रज्वलित उस आध्यात्मिक दीप की भांति है, जो आज भी लाखों लोगों के जीवन में शांति का आलोक फैला रहा है।

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