जयपुर। आस्था के प्रमुख केंद्र श्री अमरापुर स्थान, जयपुर में शुक्रवार, 22 मई को आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज का मासिक जन्मोत्सव ‘चौथ पर्व’ पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ हर्षोल्लास से मनाया गया। इस पावन अवसर पर सुबह 6 बजे से ही मंगला दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगना आरंभ हो गया, जो रात्रि 9 बजे तक अनवरत जारी रहा।

उत्सव के उपलक्ष्य में प्रभु को रिझाने के लिए विशेष भोग अर्पित किया गया। ग्रीष्म ऋतु की अधिकता को देखते हुए ऋतुराज आम और शीतल आम रस के साथ 56 व्यंजनों का थाल प्रभु के समक्ष समर्पित किया गया। महाप्रसादी के रूप में डोडा चटनी के साथ विभिन्न प्रकार के सिंधी व्यंजन जैसे हलवा, मोहन थाल और मेसू टिक्की का भोग लगाया गया।

सायंकाल 4:30 बजे से आयोजित संगीतमय ‘ब्रह्म दर्शनी’ पाठ में हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। पूज्य स्वामी मोहन प्रकाश जी महाराज ने ब्रह्म दर्शनी की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि यह ग्रंथ ब्रह्म ज्ञान का भंडार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार रामायण में सुंदरकांड का पाठ किया जाता है, उसी प्रकार श्री अमरापुर स्थान पर प्रत्येक मासिक जन्मोत्सव पर सद्गुरु टेऊँराम जी महाराज द्वारा रचित ब्रह्म दर्शनी का पाठ किया जाता है। प्रेम प्रकाश ग्रंथ के इस अंश के पाठ से मन की भेद-भ्रांति समाप्त होती है और ईश्वरीय स्वरूप का साक्षात अनुभव होता है।

भक्ति के साथ-साथ सेवा का भी अनूठा संगम इस पर्व पर देखने को मिला। नित्य प्रार्थना और भजन-सत्संग के अतिरिक्त, श्रद्धालुओं के लिए अन्न भोजन प्रसादम की व्यवस्था की गई। साथ ही, भीषण गर्मी से राहत दिलाने के उद्देश्य से राहगीरों के बीच छाछ और शरबत का वितरण भी किया गया।

इस अवसर पर 17 मई से संचालित 15 दिवसीय बाल संस्कार शिविर का उत्साह भी स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हुआ। शिविर के नन्हे बच्चों ने गुरु विग्रह पर पुष्प अर्पित कर संत-महात्माओं और अध्यापकों को चौथ पर्व की बधाई दी। बच्चों के लिए विशेष अल्पाहार का आयोजन भी किया गया। स्वामी मोहन प्रकाश जी महाराज ने इस शिविर को संस्कारों के बीजारोपण का सार्थक प्रयास बताया, जिसका समापन 31 मई को होगा।

कार्यक्रम की श्रृंखला में आगामी महत्वपूर्ण आयोजन की जानकारी देते हुए बताया गया कि प्रेम प्रकाश मंडल के संस्थापक मंगलमूर्ति आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी का चालीहा महोत्सव 9 जून से 19 जुलाई तक विश्व भर में भव्य रूप से मनाया जाएगा। इस अवसर पर स्वामी मनोहर लाल जी महाराज, संत मोहन लाल जी महाराज, संत गुरुदास, संत हरीश, अविनाश और संत उमेश सहित अनेक संत-महात्मा और सेवादार उपस्थित रहे।

Pratahkal HQ

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