सावन पूर्णिमा के अवसर पर गालव ऋषि की तपोस्थली गलता तीर्थ में ज्ञानमूर्ति पंडित दिवाकर शास्त्री के सान्निध्य में वैदिक ब्राह्मणों ने विधिवत श्रावणी उपाकर्म किया। इस दौरान प्रायश्चित कर्म, हेमाद्रि संकल्प, दशविधि स्नान, ऋषि तर्पण और नूतन यज्ञोपवीत धारण सहित विभिन्न धार्मिक विधियां संपन्न की गईं।

पंडित ज्ञानमूर्ति दिवाकर शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व जीवन में नया संकल्प लेने, ऋषियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने तथा वेदारम्भ का पर्व है। इस दिन नूतन यज्ञोपवीत धारण किया जाता है, जो मनुष्य को अपने ऊपर माने गए तीन प्रकार के ऋण—देव ऋण, पितृ ऋण एवं ऋषि ऋण—की याद दिलाता है।

श्रावणी उपाकर्म के अवसर पर राष्ट्रीय कथावाचक सतीश शास्त्री, राकेश शस्त्री, हिमेशााचार्य ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप शर्मा, पौराणिक वेदपाठी भूपेंद्र शुक्ला, मुकेश तिवारी, विकास, कमलेश, विष्णु और सुनील भारद्वाज आदि मौजूद रहे।

गलता तीर्थ में संपन्न हुआ यह श्रावणी उपाकर्म धार्मिक विधियों, ऋषि तर्पण और नूतन यज्ञोपवीत धारण के साथ वैदिक परंपरा के अनुरूप आयोजित किया गया।

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