पश्चिमी राजस्थान के मरूधरा क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई के जल संकट को हमेशा के लिए समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने सोमवार को उदयपुर के कोटड़ा क्षेत्र का दौरा कर सेई बांध की बहुप्रतीक्षित टनल विस्तार परियोजना का निरीक्षण किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के साथ ही, मानसून के दौरान व्यर्थ बहकर गुजरात जाने वाला पानी अब मारवाड़ की जीवनरेखा माने जाने वाले जवाई बांध तक तेजी से पहुंचेगा।

मंत्री कुमावत ने टनल के भीतर जाकर निर्माण कार्य की बारीकी से समीक्षा की और अब तक की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से खुदाई, तकनीकी पहलुओं और कंक्रीट लाइनिंग के बारे में विस्तृत रिपोर्ट ली। राज्य सरकार द्वारा इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। पिछले तीन वर्षों से चल रहे इस कार्य का 95 प्रतिशत हिस्सा पूर्ण हो चुका है और शेष 90 मीटर की खुदाई व निर्माण कार्य को आगामी 15 जुलाई तक हर हाल में पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ ही मंत्री ने श्रमिकों और इंजीनियरों की सुरक्षा के प्रति पुख्ता इंतजाम रखने की हिदायत दी।

इस टनल विस्तार का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव जल निकासी की क्षमता में होने वाली भारी वृद्धि है। वर्तमान में टनल की सीमित चौड़ाई के कारण पानी की निकासी 328 क्यूसेक है, जो कार्य पूर्ण होने के बाद चार गुना बढ़कर 1376 क्यूसेक हो जाएगी। इस तकनीकी बदलाव के कारण जवाई बांध को भरने का समय घटकर मात्र 22 दिन रह जाएगा, जबकि वर्तमान में इस प्रक्रिया में 45 से 50 दिन का लंबा समय लगता है। यह परियोजना पाली, सिरोही और जालोर जिलों के लिए एक संजीवनी साबित होगी, जहां पेयजल और सिंचाई की समस्या का स्थाई समाधान सुनिश्चित हो सकेगा।

सेई बांध का अतिरिक्त पानी अब जवाई बांध को कम समय में भरने के साथ ही क्षेत्र के कृषि और पेयजल जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में इस बांध क्षेत्र को इको-टूरिज्म और स्थानीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे प्राकृतिक सुंदरता का लाभ पर्यटकों को मिल सके। इस निरीक्षण के अवसर पर किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह गलथनी सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। यह परियोजना न केवल मारवाड़ के जल भविष्य को सुरक्षित करेगी, बल्कि क्षेत्र के औद्योगिक और कृषि विकास में भी एक नया अध्याय जोड़ेगी।

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