मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग को सुरक्षित एवं सम्मानपूर्वक जीवन जीने का वातावरण उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा गत ढाई वर्षों में उठाए गए कदमों के कारण अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के विरुद्ध अत्याचार के प्रकरणों में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2025 में ऐसे मामलों में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि एससी-एसटी वर्ग के विरुद्ध अपराध करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और समाज में समरसता का वातावरण बनाने में सहयोग करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि एक ओर एससी-एसटी वर्ग पर अत्याचार के मामलों में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों के 60 दिवस की निर्धारित अवधि में निस्तारण की गति भी पहले की तुलना में काफी तेज हुई है। वर्तमान में लगभग 68 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण 60 दिन के भीतर किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 45 पुलिस जिलों में एससी-एसटी सेल स्थापित किए जा चुके हैं तथा शेष 6 पुलिस जिलों में भी शीघ्र एससी-एसटी सेल स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विरुद्ध होने वाले अपराधों में दोष सिद्धि की दर में और अधिक सुधार लाने के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामाजिक समरसता और मेलजोल को बढ़ावा देने के लिए जिला एवं उपखंड स्तरीय निगरानी एवं सतर्कता समिति की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं तथा वर्ष में दो बार पंचायत स्तर पर भी इन बैठकों का आयोजन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि दर्ज प्रकरणों की सतत निगरानी की जाए और एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मामलों की जांच पूरी गंभीरता और त्वरित गति से की जाए। साथ ही, एफआईआर दर्ज होने से लेकर न्यायालय में अंतिम निस्तारण तक पीड़ितों को अधिनियम के तहत देय आर्थिक सहायता समय पर उपलब्ध करवाई जाए।

बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, पीड़ितों को सहायता, लंबित प्रकरणों के निस्तारण तथा कानून की सख्त एवं समयबद्ध अनुपालना पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई, दर्ज एफआईआर, अनुसंधान की अवधि, चालान प्रस्तुत करने की समयसीमा तथा पीड़ित परिवारों को प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान एफआईआर एवं चालान स्तर पर पिछले तीन वर्षों में वितरित आर्थिक सहायता, सहायता पोर्टल की प्रगति तथा लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने सहायता संबंधी लंबित प्रकरणों की थाना एवं जिला स्तर पर नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि पीड़ितों को समय पर राहत मिल सके। बैठक में संस्थागत शिकायत निवारण प्रणाली के अंतर्गत हेल्पलाइन, हेल्पडेस्क एवं पोर्टलों पर प्राप्त शिकायतों की रियल टाइम मॉनिटरिंग तथा उनके त्वरित समाधान की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि पुलिस, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा अभियोजन विभाग के सभी अधिकारी आपसी समन्वय और संवेदनशीलता के साथ कार्य करें, ताकि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों के न्याय, सुरक्षा और अधिकारों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार के दर्ज प्रकरणों में 15.88 प्रतिशत तथा वर्ष 2025 के पहले छह माह की तुलना में वर्ष 2026 में 15.49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों में से 35.16 प्रतिशत का निस्तारण 60 दिन में किया जा रहा था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर लगभग 47 प्रतिशत और जुलाई 2026 तक 67.88 प्रतिशत हो गया है। वहीं, प्रकरणों के निस्तारण का औसत समय 128 दिन से घटकर 53 दिन रह गया है। एफआर लगे प्रकरणों में अब 10 प्रतिशत के स्थान पर 20 प्रतिशत का रैंडम सत्यापन किया जा रहा है।

बैठक में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति के सदस्य जोगेश्वर गर्ग और फूल सिंह मीणा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा सहित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तथा संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण और पीड़ितों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

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