सवाई माधोपुर में लैंगिक हिंसा रोकथाम पर दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित
प्रशिक्षण में पुलिस और अन्य विभागों के बीच समन्वय और पीड़ितों की गोपनीयता सुनिश्चित करने पर दिया गया जोर।

सवाई माधोपुर में लैंगिक आधारित हिंसा की रोकथाम और समन्वय को लेकर दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
सवाई माधोपुर में लैंगिक आधारित हिंसा की रोकथाम और इससे प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को समय पर संवेदनशील सहायता उपलब्ध कराने के लिए दो दिवसीय जिला स्तरीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण आयोजित किया गया। 8 और 9 अक्टूबर को आयोजित इस प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कार्मिकों को हिंसा के मामलों में प्रभावी कार्रवाई, पीड़ितों के संरक्षण और विभागों के बीच बेहतर समन्वय की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी के आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, गरिमा, सम्मान और गोपनीयता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
बहुक्षेत्रीय समन्वित प्रतिक्रिया विषय पर केंद्रित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य लैंगिक आधारित हिंसा से जुड़े मामलों में विभिन्न विभागों की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाना, आपसी सहयोग बढ़ाना और पीड़ितों को आवश्यक सेवाओं से समय पर जोड़ने की व्यवस्था को मजबूत करना रहा। प्रशिक्षण के माध्यम से हिंसा से प्रभावित व्यक्तियों को सहायता एवं संरक्षण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने पर भी ध्यान दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों एवं प्रशिक्षकों ने लैंगिक आधारित हिंसा के विभिन्न स्वरूपों, उनके कारणों, प्रभावों और रोकथाम के उपायों की जानकारी दी। महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ होने वाली हिंसा की पहचान, शिकायत मिलने पर त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई, पीड़ितों को संरक्षण प्रदान करने तथा उन्हें उपलब्ध सहायता सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।
एसपी ज्येष्ठा मैत्रेयी ने कहा कि हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ व्यवहार करते समय उनकी गरिमा, सम्मान और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने पीड़ितों की बात गंभीरता से सुनने, उन्हें अनावश्यक मानसिक परेशानी से बचाने और जरूरत के अनुसार उचित सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के महत्व पर जोर दिया।
प्रशिक्षण में पुलिस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, घरेलू हिंसा अधिनियम से संबंधित व्यवस्था, वन स्टॉप सेंटर, महिला अधिकारिता विभाग, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों, महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्रों, सखी केंद्रों, सेवा प्रदाता संस्थाओं, पन्नाधाय महिला सुरक्षा एवं सम्मान केंद्रों, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा महिला एवं बाल संरक्षण से संबंधित संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा की गई।
इसके साथ ही बाल कल्याण समिति, विशेष किशोर पुलिस इकाई, जिला बाल संरक्षण इकाई और किशोर न्याय बोर्ड सहित संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय की आवश्यकता रेखांकित की गई। प्रशिक्षण में स्पष्ट किया गया कि लैंगिक आधारित हिंसा के मामलों में केवल एक विभाग की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। पीड़ितों को समुचित सहायता एवं संरक्षण उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी सूचना आदान-प्रदान, समयबद्ध कार्रवाई और आवश्यकता के अनुसार प्रकरणों को संबंधित विभागों तक पहुंचाना जरूरी है।
कार्यक्रम में लैंगिक आधारित हिंसा से संबंधित कानूनी प्रावधानों, पीड़ितों के अधिकारों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों एवं कार्मिकों को कानून के अनुरूप कार्रवाई करने के साथ ही पीड़ितों की सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता बनाए रखने के महत्व से अवगत कराया गया।
महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और हिंसा की स्थिति में बिना भय या संकोच सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा पीड़ितों को तत्काल सहायता, संरक्षण, मार्गदर्शन और संबंधित सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान चर्चा, अनुभव साझा करने और विभिन्न परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली के माध्यम से अधिकारियों एवं कार्मिकों की क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा अन्य संबंधित संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रशिक्षण का समग्र उद्देश्य लैंगिक आधारित हिंसा की रोकथाम के साथ प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को समय पर आवश्यक सहायता और संरक्षण उपलब्ध कराना रहा। विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और हिंसा-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में क्षमता निर्माण को महत्वपूर्ण माना गया।

