सवाई माधोपुर। राजस्थान की वीर धरा और रणथंभौर की गोद में बसे सवाई माधोपुर के स्थापना दिवस पर इस बार सुनहरी इबारत लिखी गई है। जिला मुख्यालय के दशहरा मैदान में आयोजित देश के पहले 'अमरूद महोत्सव एवं कृषि तकनीकी मेला-2026' ने न केवल क्षेत्र के किसानों के सपनों को नई उड़ान दी है, बल्कि सवाई माधोपुर के अमरूद को वैश्विक पहचान दिलाने का शंखनाद भी कर दिया है। रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और प्रदेश के कद्दावर कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने जब इस भव्य महोत्सव का उद्घाटन किया, तो वहां मौजूद हजारों किसानों की आंखों में खुशहाली की नई चमक दिखाई दी। सवाई माधोपुर के 263वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस मेले ने कृषि नवाचार और आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोल दिए हैं।

मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि अमरूद भले ही एक साधारण और सस्ता फल प्रतीत होता हो, लेकिन इसके स्वास्थ्यवर्धक गुण और प्रसंस्करण की संभावनाएं असाधारण हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि यह महोत्सव किसानों को वैज्ञानिकों और व्यापारियों से जोड़ने का एक साझा मंच है। बिरला ने जोर देकर कहा कि जब सवाई माधोपुर के अमरूद को तकनीक और बाजार का साथ मिलेगा, तो यहां का किसान सीधे देश-विदेश की मंडियों से जुड़ेगा। उन्होंने कृषि मंत्री द्वारा घोषित प्रोसेसिंग प्लांट को क्षेत्र के लिए 'गेम चेंजर' करार दिया, जो कच्चे फल को मूल्यवान उत्पादों में बदलकर किसानों की जेब तक सीधा लाभ पहुंचाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मंच से सवाई माधोपुर के लिए सौगातों की झड़ी लगा दी। डॉ. मीणा ने घोषणा की कि जिले में 150 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से अत्याधुनिक अमरूद प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जाएगा। उन्होंने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखते हुए बताया कि राजस्थान के कुल 14 हजार हेक्टेयर अमरूद क्षेत्र में से अकेले 11 हजार हेक्टेयर इसी जिले में है, जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की सरकार ने यहां के किसानों के फल को यहीं खपाने की जिम्मेदारी ली है। मंत्री ने लक्ष्य निर्धारित किया कि वर्तमान में अमरूद से होने वाली 600-700 करोड़ रुपये की वार्षिक आय को बढ़ाकर 1500-1600 करोड़ रुपये तक ले जाया जाएगा, ताकि किसानों को दिल्ली या बड़ौदा जैसी मंडियों पर निर्भर न रहना पड़े।

विकास की इस कड़ी को और विस्तार देते हुए डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने जिले के लिए 600 करोड़ रुपये के कुल विकास कार्यों का खाका पेश किया। उन्होंने मानसून के दौरान फसलों के नुकसान का जिक्र करते हुए सूरवाल बांध के पानी को व्यवस्थित करने के लिए 110 करोड़ रुपये की लागत से चैनल निर्माण की बात कही, जिससे सिंचाई सुविधाओं में इजाफा होगा। साथ ही, उन्होंने संशोधित पीकेसी (ईआरसीपी) योजना और डूंगरी बांध के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने इसके लिए 90 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा है, जिससे सवाई माधोपुर और करौली क्षेत्र में 1.60 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र बढ़ जाएगा। उन्होंने विस्थापित होने वाले 9 गांवों के निवासियों को सुव्यवस्थित पुनर्वास और सभी आधुनिक सुविधाएं देने का भरोसा भी दिलाया।

महोत्सव के दौरान लोकसभा अध्यक्ष और कृषि मंत्री ने मेले में लगी करीब 250 स्टॉल्स का अवलोकन किया, जहां अमरूद से बने अचार, जूस, पल्प और मिठाइयों का प्रदर्शन किया गया था। विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के साथ संवाद करते हुए अतिथियों ने किसानों को फसल बीमा और 'पर ड्रॉप, मोर क्रॉप' जैसी योजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया। उद्घाटन के इस भव्य समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आगामी समय में सवाई माधोपुर का अमरूद न केवल मिठास घोलेगा, बल्कि अपनी प्रसंस्करण इकाई और उन्नत कृषि तकनीक के दम पर क्षेत्र के आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बनेगा।

Pratahkal Bureau

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