सावित्री ठाकुर ने महिला सशक्तीकरण और परिसीमन पर विपक्ष को घेरा
केंद्रीय राज्यमंत्री ने स्वच्छ भारत और महिला आरक्षण बिल के माध्यम से सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और परिसीमन प्रक्रिया पर विपक्ष के रुख की आलोचना की।

धार/नई दिल्ली: केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा प्रहार किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तीकरण की दिशा में किए गए ऐतिहासिक कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। राज्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति और परंपरा सदैव नारी शक्ति के सम्मान की रही है, जहाँ मातृ शक्ति को पूजनीय माना गया है। इसी सांस्कृतिक गौरव को आधार बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना के केंद्र बिंदु में महिलाओं को रखा है। 2014 के उपरांत महिला उत्थान के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत देश में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। वर्तमान में 90 लाख बचत समूहों से लगभग 10 करोड़ महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं, जिसका परिणाम है कि आज 70 प्रतिशत से अधिक मातृ शक्ति स्वयं का रोजगार संचालित कर रही हैं। देश की माताओं और बहनों का मोदी जी के प्रति यह अट्टू विश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी शक्ति है।
संसदीय घटनाक्रम पर क्षोभ व्यक्त करते हुए सावित्री ठाकुर ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल की तारीखों का पूरे देश को बेसब्री से इंतजार था, किंतु विपक्ष ने इस महत्वपूर्ण अवसर पर रोड़े अटकाने का कार्य किया। सदन में प्रतिपक्ष के नेता का रवैया अत्यंत निंदनीय और शर्म से सिर झुका देने वाला रहा। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जिन्होंने महिला आरक्षण बिल का श्रेय दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी सांसदों को देने का वायदा किया, वहीं दूसरी ओर वह विपक्ष है जो इस बिल को गिराने के बाद शर्मिंदा होने के बजाय जश्न मना रहा था। यह स्पष्ट हो चुका है कि देश की आधी आबादी को इस प्रकार निराश करने के बाद विपक्ष अब देश में राजनीति करने का नैतिक अधिकार खो चुका है।
जनसंख्या और परिसीमन के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि जब देश की आबादी 54 करोड़ थी, तब से लेकर आज 140 करोड़ की आबादी होने तक स्थितियों में व्यापक बदलाव आया है, इसलिए परिसीमन की प्रक्रिया अनिवार्य हो गई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि मोदी जी ने सभी राजनीतिक दलों को विश्वास दिलाया है कि परिसीमन के पश्चात किसी भी राज्य की सीटों को कोई नुकसान नहीं होगा। इसके बावजूद विपक्ष ने अनर्गल भ्रम फैलाया और संसद एवं विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले इस ऐतिहासिक विधेयक का समर्थन नहीं किया। यह घटनाक्रम सिद्ध करता है कि विपक्ष महिला सशक्तिकरण के प्रति गंभीर नहीं है, जबकि सरकार महिलाओं को सत्ता की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

