'सार्थक-पीडीएस' योजना को मंजूरी, ₹25,530 करोड़ का बजट आवंटित
सीसीईए ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी और तकनीक-संचालित बनाने के लिए नई एकीकृत योजना को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी।

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति द्वारा स्वीकृत 'सार्थक-पीडीएस' योजना के तहत देश के 81.35 करोड़ लाभार्थियों तक खाद्यान्नों के सुरक्षित और निर्बाध अंतरराज्यीय आवागमन को सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना को एक व्यापक एकीकृत योजना के रूप में जारी रखने की मंजूरी दे दी है। यह योजना 16वें वित्त आयोग की आबंटन अवधि में लागू रहेगी और इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 25,530 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
सीसीईए ने एनएफएसए के तहत राज्य एजेंसियों को खाद्यान्न की अंतरराज्यीय आवाजाही और एफपीएस डीलरों के मार्जिन के लिए सहायता तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रौद्योगिकी के माध्यम से आधुनिकीकरण और सुधार योजना (स्मार्ट पीडीएस) को एकीकृत कर आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। साथ ही, खाद्यान्नों की अंतरराज्यीय आवाजाही, हैंडलिंग तथा एफपीएस डीलरों के मार्जिन पर होने वाले व्यय को पूरा करने के लिए केंद्रीय सहायता के मानदंडों में संशोधन करते हुए मौजूदा वित्तपोषण पैटर्न को जारी रखने की भी मंजूरी दी गई है।
यह एकीकृत ‘सार्थक पीडीएस’ योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए) के कार्यान्वयन को और अधिक व्यापक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके अंतर्गत दो पूर्ववर्ती योजनाओं—(i) “एनएफएसए के तहत खाद्यान्नों के अंतर-राज्यीय आवागमन और एफपीएस डीलरों के मार्जिन के लिए राज्य एजेंसियों को सहायता” तथा (ii) “सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रौद्योगिकी के माध्यम से आधुनिकीकरण और सुधार की योजना (स्मार्ट पीडीएस)”—को एकीकृत किया गया है।
सरकार की इस योजना का उद्देश्य अंतरराज्यीय आवागमन, हैंडलिंग और एफपीएस डीलर के मार्जिन के लिए सुनिश्चित वित्तीय सहायता प्रदान करना तथा एक एकीकृत, नागरिक-केंद्रित, बुद्धिमान और अंतरसंचालनीय पीडीएस संरचना विकसित करना है, जिससे अंतिम दूरी तक वितरण सुनिश्चित हो, लीकेज में कमी आए और एनएफएसए के तहत खाद्य सुरक्षा के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता और मजबूत हो सके। यह योजना 31 मार्च, 2031 तक संचालित रहेगी।
‘सार्थक-पीडीएस’ के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), स्वाभाविक भाषा प्रसंस्करण (एनएलपी) और ब्लॉकचेन जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से आधुनिक, एकीकृत और बुद्धिमत्तापूर्वक अनुकूलित करने की परिकल्पना की गई है। इसके अंतर्गत तत्काल निगरानी के लिए मानकीकृत संरचनाएं एवं एकीकृत डेटाबेस, एआई-संचालित शिकायत एवं विश्लेषण प्रणाली, डेटा-संचालित निरीक्षण के लिए राज्य कमांड नियंत्रण केंद्र तथा आईएसओ-प्रमाणित प्रसंस्करण संरचनाओं का विकास किया जाएगा, जिससे पीडीएस संचालन में पारदर्शिता, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
सरकार के अनुसार गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्नों की पर्याप्त उपलब्धता के माध्यम से 81.35 करोड़ व्यक्तियों को भोजन और पोषण सुरक्षा प्रदान करना भारत सरकार की सामाजिक एवं कानूनी प्रतिबद्धता है, जिससे उन्हें गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित किया जा सके। यह एकीकृत योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अंतर्गत लाभार्थियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और प्रभावी रूप से पूरा करने की दिशा में कार्य करेगी।
पिछले एक दशक में सरकार ने टीपीडीएस के संपूर्ण कम्प्यूटरीकरण, पीडीएस के एकीकृत प्रबंधन (आईएम-पीडीएस) और स्मार्ट पीडीएस जैसी कई डिजिटलीकरण पहलों के साथ ‘मेरा राशन’, ‘अन्न मित्र’, ‘राइटफुल टारगेटिंग डैशबोर्ड’ और ‘अन्न सहायता’ जैसी नागरिक-केंद्रित योजनाओं को भी लागू किया है। 1 अप्रैल, 2023 से स्मार्ट पीडीएस योजना 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में राशन कार्डों के पूर्ण डिजिटलीकरण, आधार सीडिंग, ई-पीओएस के माध्यम से एफपीएस स्वचालन, ऑनलाइन आवंटन तथा कम्प्यूटरीकृत आपूर्ति-श्रृंखला प्रबंधन को सक्षम बनाकर तकनीक-आधारित सुधारों की आधारशिला के रूप में कार्य कर रही है।
यह निर्णय सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक दक्ष, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाते हुए देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau
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