जयपुर। गुलाबी नगरी के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री खोले के हनुमान जी मंदिर परिसर में आज एक अद्भुत आध्यात्मिक छटा देखने को मिली, जहाँ शिक्षा और संस्कृति के संगम ने बसंत पंचमी के पर्व को जीवंत कर दिया। मंदिर स्थित वेद विद्यालय के प्रांगण में विद्या की देवी मां सरस्वती का आह्वान अत्यंत हर्षोल्लास और पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया। पीले वस्त्रों में सजे बटुकों के मंत्रोच्चार और श्रद्धापूर्ण वातावरण ने इस उत्सव को न केवल धार्मिक रूप दिया, बल्कि प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति की गौरवशाली झलक भी पेश की।

कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए श्री नरवर आश्रम सेवा समिति के महामंत्री बृजमोहन शर्मा ने बताया कि बसंत पंचमी के इस पावन अवसर पर वेद विद्यालय के बटुकों ने पूरी तन्मयता के साथ मां शारदे की पूजा-अर्चना की। आयोजन का मुख्य आकर्षण विद्यालय के छात्रों द्वारा किया गया सरस्वती मां के श्लोकों का सामूहिक उच्चारण रहा, जिसकी गूंज से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी का दिन बुद्धि और विवेक की प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है, और इसी भावना को आत्मसात करते हुए विद्यार्थियों ने ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी से आशीर्वाद प्राप्त किया।

समिति के सचिव और अन्य पदाधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुए इस समारोह ने यह संदेश दिया कि आधुनिक युग में भी हमारे संस्कार और शास्त्र उतने ही प्रासंगिक हैं। सामूहिक वंदना और अनुष्ठानों के माध्यम से बटुकों ने न केवल अपनी शिक्षा के प्रति समर्पण दिखाया, बल्कि समाज को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा भी दी। इस आयोजन ने सिद्ध कर दिया कि खोले के हनुमान मंदिर केवल एक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी में सांस्कृतिक मूल्यों को सींचने वाला एक महत्वपूर्ण स्तंभ भी है।

Pratahkal Bureau

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