जयपुर में सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025: NIF ग्लोबल व राजीविका की विशेष वर्कशॉप से निखरी ग्रामीण प्रतिभा, त्रितय चौपला ने रचा सांस्कृतिक उल्लास
जयपुर में आयोजित सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 में NIF ग्लोबल (कमला पोद्दार ग्रुप) व राजीविका की विशेष वर्कशॉप के जरिए ग्रामीण महिलाओं को हस्तकला का प्रशिक्षण दिया गया। उत्तराखंड के लोक कलाकार अमित सिंह बिष्ट की त्रितय चौपला प्रस्तुति ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाया।

जयपुर, 29 दिसंबर। राजस्थान की ग्रामीण प्रतिभाओं, पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने वाला सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 सोमवार को नई ऊंचाइयों पर नजर आया। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद द्वारा आयोजित इस मेले में NIF ग्लोबल (कमला पोद्दार ग्रुप) एवं राजीविका के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष कौशल-विकास वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसने महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त संदेश दिया।
इस वर्कशॉप का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं और प्रतिभागियों को पारंपरिक हस्तकलाओं की बारीकियां सिखाकर उनके कौशल को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप निखारना रहा। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान वर्ली पेंटिंग, क्रोशिया कला और सुंदर कढ़ाई जैसी लोकप्रिय पारंपरिक विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। अनुभवी प्रशिक्षकों ने डिज़ाइन तकनीक, रंग संयोजन और इन कलाओं के आधुनिक उपयोग पर विस्तार से मार्गदर्शन किया। वर्कशॉप में 15 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं सहित 10 अन्य आगंतुकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस पहल को आजीविका संवर्धन की दिशा में उपयोगी बताया।
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 की गूंज केवल आयोजन स्थल तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया पर भी यह मेला तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। जयपुर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे जाने-माने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स मेले की हस्तशिल्प कला, ग्रामीण उत्पादों और सांस्कृतिक झलकियों को अपनी रील्स और पोस्ट्स के माध्यम से साझा कर रहे हैं, जिससे मेले को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिल रही है।
शाम ढलते ही मेले की सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को लोक रंगों में सराबोर कर दिया। उत्तराखंड से आए प्रसिद्ध लोक कलाकार अमित सिंह बिष्ट ने अपनी टीम के साथ त्रितय चौपला की मनमोहक प्रस्तुति दी। यह उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र का पारंपरिक लोक नृत्य है, जो बसंत ऋतु और फसल कटाई के पर्व बैसाखी के अवसर पर किया जाता है। पुरुषों और महिलाओं द्वारा गोल घेरे में किए गए इस नृत्य ने जीवन के सुख-दुख, प्रकृति की सुंदरता और सामूहिक आनंद का सजीव चित्र प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने ‘चारों ओर फूलों की वर्षा’ के रूप में अनुभव किया।
कौशल-विकास, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और नवाचार के संगम के साथ सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 ग्रामीण प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरक पहल के रूप में उभरता नजर आ रहा है।
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Pratahkal Bureau
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