जयपुर, 20 दिसंबर। जवाहर कला केंद्र जयपुर के शिल्पग्राम में आयोजित सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 इन दिनों सांस्कृतिक जीवंतता, हस्तशिल्प की विविधता और महिला सशक्तिकरण का सशक्त मंच बनकर उभर रहा है। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद के तत्वावधान में आयोजित यह राष्ट्रीय मेला दिन-प्रतिदिन जनसैलाब को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। शनिवार को मेले में दिनभर जयपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से आए हजारों लोगों ने परिवार और मित्रों संग शिरकत कर मेले के रंग-बिरंगे और जीवंत वातावरण का आनंद लिया।

मेले में न केवल खरीदारी का उत्साह देखने को मिल रहा है, बल्कि लकी ड्रा के परिणामों को लेकर भी आगंतुकों में खासा उत्साह बना हुआ है। विजेताओं को मौके पर पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे मेले का रोमांच और बढ़ गया है। यह मेला जवाहर कला केंद्र परिसर में आगामी 4 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा।

मेले के फूड कोर्ट में देश के विभिन्न राज्यों से आए पारंपरिक और लोकप्रिय व्यंजनों ने स्वाद प्रेमियों को आकर्षित किया, वहीं दूसरी ओर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित हस्तनिर्मित उत्पादों की जमकर खरीदारी हो रही है। कपड़ा, आभूषण, सजावटी वस्तुएँ और उपयोगी हस्तशिल्प उत्पाद लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं।

इस वर्ष सरस राजसखी मेले की सबसे बड़ी विशेषता कारीगरों द्वारा किया जा रहा लाइव डेमो है, जिसने मेले को एक जीवंत कार्यशाला का रूप दे दिया है। आगंतुक पारंपरिक कलाओं को बनते हुए न केवल देख रहे हैं, बल्कि उनकी तकनीक और बारीकियों को भी करीब से समझ पा रहे हैं। अलवर के कारीगर लाख की चूड़ियाँ, पारंपरिक परिधान, मिट्टी के बर्तन और ब्लैक पॉटरी का सजीव निर्माण कर रहे हैं, जबकि झुंझुनूं के कलाकार लिप्पन कला, क्रोशिया एक्सेसरीज़ और पारंपरिक कढ़ाई का प्रदर्शन कर रहे हैं। जयपुर के कारीगर अगरबत्ती निर्माण की प्रक्रिया दिखा रहे हैं और चूरू के कारीगर टाई एंड डाई के आकर्षक नमूनों को साकार कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।

मेले का एक और प्रमुख आकर्षण कस्टमाइज़ेशन ज़ोन बनकर सामने आया है, जहाँ आगंतुकों को अपनी पसंद के अनुसार पूरी तरह पर्सनलाइज़्ड हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करवाने की सुविधा मिल रही है। कुशल कारीगर मौके पर ही रंग, डिज़ाइन, नाम, मोटिफ और पैटर्न के अनुसार उत्पाद तैयार कर रहे हैं। हाथ से बनी और रेज़िन की की-चेन, कढ़ाई वाले स्कार्फ और परिधान, सजावटी लकड़ी व रेज़िन बॉक्स, मिनिएचर, कोस्टर, पेन स्टैंड, ट्रे और प्राकृतिक रेज़्ड आर्ट जैसी वस्तुएँ लाइव कस्टमाइज़ेशन के माध्यम से खास और यादगार रूप ले रही हैं।

इसके साथ ही स्टाइल स्टूडियो स्टॉल ‘ड्रेस ड्रेप क्लिक’ भी आगंतुकों के बीच विशेष लोकप्रियता हासिल कर रहा है। यहाँ लोग राजस्थानी, गुजराती, मराठी, पहाड़ी सहित देश की विभिन्न पारंपरिक ड्रेपिंग शैलियों को आज़माकर सांस्कृतिक विरासत को कैमरे में कैद कर रहे हैं। पारंपरिक गहने, पगड़ी, ओढ़नी और एथनिक एक्सेसरीज़ के साथ बने इंस्टेंट फोटो कॉर्नर में खिंचवाई जा रही तस्वीरें इस अनुभव को अविस्मरणीय बना रही हैं।

कुल मिलाकर सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय लोक कला, सांस्कृतिक विविधता और ग्रामीण महिलाओं की सृजनात्मक शक्ति का जीवंत उत्सव बन चुका है, जो परंपरा और आधुनिकता के सुंदर संगम के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।

Pratahkal Bureau

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