सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला-2025: डिजिटल सशक्तिकरण और सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला-2025 जयपुर में "भारत – एक सूत्रधार" थीम पर आयोजित, जहां डिजिटल सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिला। नाट्य प्रस्तुति और पारंपरिक कला ने मेले को राष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक बनाया।

जयपुर, 23 दिसंबर। भारतीय संस्कृति और विविधता को एक सूत्र में पिरोने की प्रेरक पहल के रूप में “भारत – एक सूत्रधार” थीम पर आधारित सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला-2025 इस समय देशभर के लोगों का आकर्षण केंद्र बना हुआ है। मेले में विभिन्न राज्यों से आए हस्तशिल्पकार, वस्त्र निर्माता, रसोइये और कलाकार भारतीय परंपरा और आधुनिक रुझानों का जीवंत संगम प्रस्तुत कर रहे हैं।
मेले के दौरान, डिजिटल सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एनआईएफ ग्लोबल जयपुर, कमला पोद्दार इंस्टीट्यूट और राजीविका के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष जागरूकता नाट्य प्रस्तुति का आयोजन किया गया। इस प्रस्तुति में आत्मविश्वास, प्रभावी ग्रूमिंग और डिजिटल टूल्स के महत्व को सहज और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। मंचीय नाट्य दृश्यों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि कॉन्फिडेंट कम्युनिकेशन और पेशेवर प्रेज़ेंटेशन व्यवसाय में ग्राहक जुड़ाव बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन भुगतान प्रणाली की प्रासंगिकता को भी उजागर किया गया। वाट्सअप, वाट्सअप बिजनेस और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर घर बैठे व्यवसाय विस्तार, ऑर्डर प्रबंधन, उत्पाद प्रचार और डिलीवरी की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के तरीकों को दर्शाया गया। एनआईएफ ग्लोबल जयपुर और कमला पोद्दार इंस्टीट्यूट के छात्रों द्वारा प्रस्तुत इस नाट्य प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा और इसे डिजिटल साक्षरता और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सार्थक पहल बताया।
मेले में मंगलवार को टेक्सटाइल सेक्शन में महिलाओं की भारी भीड़ रही। पंजाब, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों से आए पारंपरिक वस्त्र अपनी विशिष्ट बनावट और आकर्षक डिज़ाइन के कारण बेहद लोकप्रिय रहे। रंग-बिरंगे परिधान, बारीक हस्तनिर्मित कढ़ाई और क्षेत्रीय कला की झलक ने खरीदारों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी मेले के उत्सव को चार चांद लगाए। राजस्थानी लोक नृत्य और मधुर मांड गायन के साथ ही बिहार के पारंपरिक लोक नृत्य—जजिया और जाट-जतिन—ने दर्शकों का मन मोह लिया। तालियों की गड़गड़ाहट और दर्शकों की उत्सुकता से पूरा परिसर एक उत्सवधर्मी वातावरण में डूब गया।
सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला-2025 न केवल सांस्कृतिक विविधता का जश्न है, बल्कि यह डिजिटल सशक्तिकरण और आधुनिक व्यापारिक प्रशिक्षण के लिए भी एक प्रेरक मंच साबित हो रहा है। इस मेले के माध्यम से भारतीय हस्तशिल्प और व्यवसायिक कौशल के विकास में नई राहों का संकेत मिलता है, जो आत्मनिर्भर भारत के सपने को और सशक्त बनाता है।
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