जयपुर, 28 फरवरी 2026। अविभाजित भारत के सिंध की धरती संतों की धरती रही है, सिंध के सिरेवाल-टंडो अल्हयार में एक महान संत गंगाराम जी का जन्म हुआ। बाल्यकाल से ही उनकी प्रीति भगवान में थी। कहते हैं कि लोक कल्याण के लिए ही संतों का जन्म होता है। संत गंगाराम साहिब ने निर्धनों और दरिद्र नारायण की सेवा पर ज़ोर दिया। कई स्थानों पर इनके मंदिर बने हुए हैं, जयपुर के मालवीय नगर स्थित सेक्टर तीन में इनका भव्य मंदिर बना हुआ है। स्थानीय आदर्श नगर स्थित गीता भवन में इनका मेला लगाया जाता है।

मेले की परंपराएं और पवित्र दर्शन

मेला संयोजक मोहन गंगवानी ने बताया कि "इस मेले में संत की चांदी की लाठी के दर्शन होते हैं, साथ ही समाधि के अंश दर्शनों के लिए रखे जाते हैं। समाधि पर पगड़ी धारण कराई जाती है तथा सुंदर श्रृंगार किया जाता है।" दो दिवसीय मेले के तहत फाल्गुन शुक्ल एकादशी और द्वादशी पर मेला भरा जाता है। कई स्थानों से आए संत महात्मा दोनों दिन प्रवचन करते हैं। आदर्श नगर स्थित गीता भवन में चल रहे मेले के दूसरे दिन सामाजिक सरोकार के तहत चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। फिर गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष अरदास हुई। बच्चों के जनेऊ और मुंडन संस्कार संपन्न हुए। दादी राधा निमाणी ने भजनों की प्रस्तुति दी। बहिराणा साहब की ज्योति प्रज्ज्वलित की गई। जल और ज्योति की आराधना कर भगवान झूलेलाल को रिझाया गया।

संतों का सानिध्य और आध्यात्मिक संदेश

माता लीलावती दरबार के संतों ने अपने प्रवचनों में कहा कि "संत गंगाराम साहब के दरबार में आने से मन को शांति मिलती है, भक्ति और आत्म चिंतन की भावना जागृत होती है, जीवन के प्रति आशा और उत्साह बढ़ता है। हम सिंध को छोड़कर आए लेकिन हमें हमारे संतो को नहीं भूलना चाहिए। उनकी वाणी हमें जीवन जीने का उद्देश्य देती है ऐसे मेलों से जीवन में सत्संग मिलता है और सेवा की भावना जागृत होती है।" इसके साथ ही जिन युगलों का पिछले वर्ष विवाह हुआ था उन्होंने फिर से संत की समाधि के समक्ष सामूहिक फेरे लगाए और अपने नव विवाहित जीवन के सुखी होने का आशीर्वाद मांगा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भक्तिमय संध्या

महिलाओं ने सिंधी लोक नृत्य छेज की प्रस्तुति दी और डांडिया खनकाए और आरती में बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया। सत्संग की सुहानी शाम को कटनी के प्रसिद्ध बालक मंडली के गोवर्धन उदासी और दिलीप उदासी ने भजन प्रस्तुति कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की। उन्होंने सिंध की माटी को नमन करते हुए कई गीत प्रस्तुत किए। "छुक छुक करती रेल चली जीवन की...." भजन प्रस्तुति कर जीवन की क्षण भंगुरता पर उपदेश दिया। उनके भजनों में संत गंगाराम साहिब की महिमा का गुणगान किया।

व्यवस्था एवं गणमान्य जनों की उपस्थिति

हजारों श्रद्धालुओं ने दोनों समय भोजन प्रसाद का आनंद लिया। नंदलाल नत्थू मल गंगवानी, नंदलाल ताराचंद गंगवानी, कन्हैयालाल खूबचंद गंगवानी, सुखदेव झम्मू मल रामचंदानी, अशोक गंगवानी, हेमंत दास रामचंदानी, धर्मेंद्र गंगवानी सहित कई पदाधिकारियों ने व्यवस्थाओं को संभाला। इस अवसर पर बाबूलाल गुरनानी, सुंदरलाल तोरानी सहित कई समाज बंधु उपस्थित हुए।

Pratahkal Newsroom

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