जयपुर के श्री अमरापुर स्थान में 15 दिवसीय बाल संस्कार शिविर का हुआ समापन
अमरापुर स्थान में आयोजित शिविर में 80 से अधिक बच्चों ने सनातन धर्म संस्कृति, श्लोक उच्चारण और महापुरुषों की जीवनी से जुड़ी व्यावहारिक शिक्षा अर्जित की।

जयपुर के श्री अमरापुर स्थान में आयोजित 15 दिवसीय बाल संस्कार शिविर के समापन समारोह पर प्रमाण पत्र और उपहारों के साथ संतों के सान्निध्य में उपस्थित प्रतिभागी बच्चे।
जयपुर। आस्था, भक्ति और श्रद्धा के पावन केंद्र श्री अमरापुर स्थान, जयपुर में आयोजित 15 दिवसीय संस्कारों की पाठशाला का संत-महात्माओं की गरिमामय उपस्थिति में भव्य समापन हो गया है। इस अनूठे शिविर ने नौनिहालों के जीवन में संस्कारों की मजबूत नींव रखकर उन्हें भविष्य की ऊंची उड़ान के लिए तैयार कर दिया है। आचार्य जितेंद्र दाधीच वेदाचार्य के सान्निध्य में संचालित इस 15 दिवसीय संस्कारों की पाठशाला में 80 से अधिक बच्चों ने सहभागिता की। शिविर के दौरान बच्चों ने प्रार्थना, संस्कार, गणेश मंत्र, गुरु मंत्र, सूर्य मंत्र, स्नान मंत्र, राम मंत्र, कृष्ण मंत्र, श्लोक उच्चारण, गणेश वंदना, सस्वर हनुमान चालीसा, आरती, प्रेम प्रकाश ग्रन्थ ज्ञान, महापुरुषों की जीवनी दर्शन, कथाएं और सदगुरु टेऊँराम जी महाराज की सोलह शिक्षाएं एवं प्रार्थना इत्यादि का पूर्ण व्यावहारिक ज्ञान अर्जित किया, जिससे उनके जीवन की प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण नींव सुदृढ़ हुई है।
इस पावन अवसर पर पूज्य स्वामी मोहन प्रकाश जी महाराज ने उद्बोधन देते हुए बताया कि शिविरार्थियों को सनातन धर्म संस्कृति से जुड़ी अमूल्य आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान की गई है। उन्होंने रेखांकित किया कि जीवन के ये गुण और संस्कार ही मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला हैं, जो आगामी समय में बच्चों के करियर तथा सफलता के मार्ग में आने वाले हर पड़ाव में अपना अभूतपूर्व योगदान देंगे। भव्य समापन कार्यक्रम के दौरान नौनिहालों ने अमरापुर बाल शिविर में अर्जित किए गए समस्त ज्ञान, मंत्र, श्लोक, चालीसा पाठ और प्रार्थना आदि को कंठस्थ याद कर मौखिक एवं लिखित रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। बच्चों के इस अद्वितीय प्रदर्शन और हौसले को बढ़ाने के लिए उनके माता-पिता सहित परिवारजन भी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिन्होंने निरंतर तालियों की गड़गड़ाहट से बच्चों का उत्साहवर्धन किया। अभिभावकों ने बच्चों में आए इन उच्च कोटि के संस्कारों को देखकर अत्यंत हर्ष व्यक्त किया तथा इस पुनीत कार्य के लिए उपस्थित संत-महात्माओं और गुरुजनों का सहृदय धन्यवाद ज्ञापित किया।
शिविर के सफल संचालन के अंतर्गत बच्चों की आयु के आधार पर दो विशेष वर्ग बनाए गए थे, जिसमें 5 वर्ष से 9 वर्ष तक के बच्चों को बाल वर्ग और 9 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को किशोर वर्ग में सम्मिलित किया गया। प्रतियोगिता और अनुशासन के मापदंडों के आधार पर बाल वर्ग एवं किशोर वर्ग, दोनों में ही प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों सहित पांच-पांच सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, शिविर के प्रति निष्ठा और उत्साह बनाए रखने के लिए अन्य सभी संभागियों को विशेष प्रमाण पत्र और आकर्षक उपहार देकर सम्मानित किया गया। इस भव्य एवं गरिमामयी समापन समारोह के सुअवसर पर लखन भैया जी, आत्म प्रकाश खुराना जी, अविनाश संत, ऋषि, भरत और पुनीत सहित अनेक गणमान्य जन, सेवाधारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने बच्चों के उज्ज्वल और सुसंस्कृत भविष्य की कामना करते हुए इस आध्यात्मिक आयोजन की महत्ता को और अधिक प्रगाढ़ किया।

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