सैनेटरी नैपकिन गुणवत्ता पर सवाल निराधार, सरकार का दावा
11.34 रुपये प्रति पैकेट खरीद, BIS मानकों के अनुरूप गुणवत्ता जांच और 161.18 करोड़ रुपये वार्षिक बचत का दावा

जयपुर में चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सैनेटरी नैपकिन की गुणवत्ता पर उठे सवालों को खारिज करते हुए बताया कि BIS मानकों के तहत लैब परीक्षण में सभी बैच सही पाए गए और खरीद प्रक्रिया पारदर्शी है
जयपुर, 28 अप्रैल। प्रदेश में सैनेटरी नैपकिन की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने स्पष्ट शब्दों में सभी आरोपों को निराधार करार दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बेटियों और किशोरियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी।
मंत्री श्री खींवसर ने बताया कि राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के माध्यम से सैनेटरी नैपकिन की खरीद पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता मानकों और वित्तीय अनुशासन के तहत की जा रही है। वर्तमान में यह खरीद भारत सरकार के उपक्रम HLL Lifecare के जरिए 11.34 रुपये प्रति पैकेट की दर से हो रही है, जो पूर्व वर्षों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2022 में कांग्रेस सरकार के दौरान यही खरीद 16.80 रुपये प्रति पैकेट में की गई थी। इस प्रकार वर्तमान दर 5.46 रुपये प्रति पैकेट कम है, जिससे राज्य सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 161.18 करोड़ रुपये की संभावित बचत होगी, जिसे जनकल्याणकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में उपयोग किया जाएगा।
गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों पर मंत्री ने कहा कि आपूर्ति शुरू होने से पहले सैंपल की जांच कराई गई थी और इसके बाद भी विभिन्न जिलों से रैंडम सैंपल लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराया गया। अब तक 12 बैचों में से 10 बैचों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और सभी तकनीकी मानकों के अनुरूप पाई गई हैं। उन्होंने बताया कि वजन, ब्लड एब्जॉर्प्शन क्षमता, थिकनेस और लंबाई सहित सभी प्रमुख पैरामीटर निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं। राज्य सरकार द्वारा खरीदे जा रहे सैनेटरी नैपकिन BIS 5405:2019 मानक के अनुसार हैं और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया लगातार जारी है।
श्री खींवसर ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में वितरित किए जा रहे सैनेटरी नैपकिन को लेकर लाभार्थियों या संबंधित विभागों की ओर से कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी बताया कि अब तक आपूर्ति किए गए नैपकिन के विरुद्ध कोई भुगतान नहीं किया गया है और यदि गुणवत्ता परीक्षण में कोई कमी सामने आती है तो भुगतान में कटौती सहित अन्य आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार एक ओर बेटियों के स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है, वहीं दूसरी ओर पारदर्शी खरीद प्रणाली के माध्यम से करोड़ों रुपये की बचत कर जनता के धन का संरक्षण भी सुनिश्चित कर रही है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा बल्कि वित्तीय अनुशासन का भी मजबूत उदाहरण बनकर सामने आई है।

