सहकारिता शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने की 'टू-डू लिस्ट' की समीक्षा
डॉ. समित शर्मा ने विभागीय लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु समयबद्ध कार्य निष्पादन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।

जयपुर के शासन सचिवालय में सहकारिता शासन सचिव डॉ. समित शर्मा (बीच में) विभागीय अधिकारियों के साथ 'टू-डू लिस्ट' के अंतर्गत लंबित कार्यों की समीक्षा करते हुए।
राजस्थान के सहकारिता विभाग में कार्यप्रणाली को नई गति और जवाबदेही प्रदान करने के उद्देश्य से शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा ने सोमवार को शासन सचिवालय स्थित अपने कक्ष में विभागीय अधिकारियों की 'टू-डू लिस्ट' की सघन समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अधिकारियों को पूरे मनोयोग के साथ समयबद्ध कार्य निष्पादन सुनिश्चित करना होगा। डॉ. शर्मा ने जोर देकर कहा कि कार्यों की स्पष्ट प्राथमिकता तय कर योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ने से न केवल विभागीय गति बढ़ेगी, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही के मानक भी स्थापित होंगे।
समीक्षा बैठक के दौरान शासन सचिव ने अधिकारियों की टू-डू लिस्ट में समाहित प्रत्येक बिंदु पर सूक्ष्मता से चर्चा की, जिसमें वर्तमान प्रगति, आगामी कार्ययोजना (फ्यूचर प्लान ऑफ एक्शन), संभावित समयसीमा तथा अपेक्षित परिणामों का विस्तार से विश्लेषण किया गया। उन्होंने सहकार वन की स्थापना, विभाग को भ्रष्टाचारमुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कार्यप्रणाली, बायोमीट्रिक उपस्थिति के क्रियान्वयन, डीपीसी प्रक्रिया और अधिकारियों के प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली। इसके अतिरिक्त, सहकारी संस्थाओं में रिक्त पदों पर भर्तियों की स्थिति, भारत टैक्सी की अभिनव शुरुआत, गोदाम निर्माण कार्य, गोदामों का डब्ल्यूडीआरए रजिस्ट्रेशन, कस्टम हायरिंग सेंटर्स की स्थापना तथा प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्रों के सुचारू संचालन को लेकर डॉ. शर्मा ने अधिकारियों को कार्यों के निष्पादन में त्वरित गति लाने के सख्त निर्देश दिए।
डॉ. शर्मा ने रेखांकित किया कि टू-डू लिस्ट मात्र कार्यों की एक सूची नहीं है, अपितु यह विभागीय लक्ष्यों को समय पर हासिल करने का एक प्रभावी और सशक्त माध्यम है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अनुभाग स्तर पर भी सतत समीक्षा की परिपाटी अपनाएं ताकि विभाग में परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति का विकास हो सके। अंत में उन्होंने दोहराया कि समस्त क्रियान्वयन में गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देना अनिवार्य है, जिससे विभाग के विकासोन्मुख प्रयासों का सीधा लाभ लक्षित वर्ग तक पहुंच सके।

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