जयपुर, 27 फरवरी। विश्व प्रसिद्ध खारे जल की झील सांभर लेक में आज वन विभाग के तत्वावधान में कोच्या की ढाणी स्थित इंटरप्रिटेशन सेंटर परिसर में एक दिवसीय सांभर बर्ड फेस्टिवल का दिव्य एवं भव्य आयोजन हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, पर्यटकों एवं स्थानीय समुदाय को झील की समृद्ध वेटलैंड पारिस्थितिकी, जैव विविधता तथा प्रवासी पक्षियों के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा। प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता को केंद्र में रखकर आयोजित इस फेस्टिवल ने पर्यावरण जागरूकता का सशक्त संदेश दिया।

प्रशासनिक गरिमा और जनभागीदारी का उत्साह

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डीएफओ जयपुर श्री वी. केतन कुमार उपस्थित रहे। उनके साथ उपखंड अधिकारी सांभर श्री ऋषिराज कपिल, सांभर साल्ट्स लिमिटेड के जीएम श्री वी. जी. मेहरिया, पशुपालन विभाग के नोडल अधिकारी श्री गणेश कुमार गर्ग सहित वन विभाग के अधिकारीगण, रेंज स्टाफ, एनजीओ प्रतिनिधि तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। इस दौरान 250 से अधिक स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

तकनीक, परंपरा और प्रदर्शनी के माध्यम से जागरूकता

फेस्टिवल में तकनीक और परंपरा का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। यहाँ सांभर की जैव विविधता एवं दुर्लभ पक्षियों की आकर्षक फोटो प्रदर्शनी लगाई गई तथा नमक उत्पादन की पारंपरिक प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन किया गया। साथ ही एवियन बोटुलिज़्म प्रबंधन एवं पक्षी रोगों की रोकथाम संबंधी जानकारी तथा “एक जिला एक प्रजाति” अंतर्गत पंच गौरव लिसोड़ा की प्रदर्शनी ने उपस्थित जनसमूह को विशेष रूप से आकर्षित किया। स्कूली बच्चों के लिए ड्राइंग, क्विज एवं जागरूकता प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं और विजेताओं को सम्मानित किया गया। बच्चों को झील क्षेत्र में बर्ड वॉचिंग करवाई गई तथा कठपुतली नृत्य के माध्यम से संरक्षण का संदेश दिया गया।

डिजिटल प्रशिक्षण और नमक उत्पादन का लाइव सत्र

आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए eBird ऐप के माध्यम से पक्षियों की पहचान एवं डिजिटल रिकॉर्डिंग का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त नमक उत्पादन का लाइव सत्र आयोजित किया गया, जिससे प्रतिभागियों को पारंपरिक उद्योग की वास्तविक प्रक्रिया से अवगत होने का अवसर मिला।

रामसर साइट का संरक्षण और भविष्य का संकल्प

सांभर लेक जो कि एक अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की रामसर साइट है, इसके संरक्षण हेतु इच्छुक प्रतिभागियों का ‘वेटलैंड मित्र’ के रूप में पंजीकरण भी किया गया, ताकि जनभागीदारी को स्थायी स्वरूप दिया जा सके। वन विभाग ने यह विश्वास व्यक्त किया कि "ऐसे आयोजन पर्यटन संवर्धन के साथ-साथ वैज्ञानिक डेटा संग्रहण, जनजागरूकता और संरक्षण प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।" अंततः कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण के सामूहिक संकल्प और प्रकृति के प्रति प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

Pratahkal Newsroom

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