राजस्थान के सहकारिता जगत में प्रशासनिक शुचिता और सकारात्मक बदलाव की सुगबुगाहट के बीच प्रदेश के वरिष्ठ सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नवनियुक्त शासन सचिव, रजिस्ट्रार एवं अपैक्स बैंक प्रशासक डॉ. समित शर्मा से आत्मीय मुलाकात की। शासन सचिवालय में आयोजित इस भेंट के दौरान आमेरा ने डॉ. शर्मा को उनके महत्वपूर्ण उत्तरदायित्वों के लिए पुष्प गुच्छ और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक पौधा भेंट कर बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई इस चर्चा के दौरान सहकार नेता ने "पैक्स से अपैक्स" तक के कर्मचारियों की भावनाओं को समाहित करते हुए एक विस्तृत अभिनंदन-पत्र सौंपा, जिसमें सहकारी आंदोलन के भविष्य और बैंकिंग व्यवस्था की चुनौतियों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।

अभिनंदन-पत्र के माध्यम से आमेरा ने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शी नेतृत्व की अनिवार्यता पर बल दिया। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा सहकारी बैंकों (सीसीबी) को देय ऋण माफी ब्याज के ₹765.57 करोड़ और ब्याज अनुदान के ₹568.62 करोड़ के बकाया भुगतान को तत्काल सुनिश्चित करने की मांग रखी। प्रतिनिधिमंडल ने आरबीआई के नीति-निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए केवल "योग्य एवं पात्र" अधिकारियों को ही प्रबंध निदेशक (MD) के पदों पर नियुक्त करने, पैक्स मिनी बैंक और सीसीबी में प्रभावी निरीक्षण व्यवस्था लागू करने तथा अनियमितता, गबन व घोटालों पर त्वरित दंडात्मक कार्यवाही करने का आग्रह किया। इसके अतिरिक्त सहकारी अधिनियम के तहत ऋण वसूली हेतु कुर्की-नीलामी पर लगी रोक हटाने, बैंकों में स्टाफ स्ट्रेंथ की समीक्षा, नई भर्ती, पारदर्शी स्थानांतरण नीति और जेएआईआईबी/सीएआईआईबी उत्तीर्ण कर्मियों को वेतन वृद्धि का समय पर भुगतान करने जैसे ज्वलंत मुद्दे उठाए गए। सहकार नेता ने पैक्स कैडर के गठन और कर्मचारियों हेतु उचित प्रशिक्षण नीति पर भी त्वरित निर्णय की आवश्यकता जताई।

इस महत्वपूर्ण शिष्टाचार भेंट में आमेरा के साथ अपैक्स बैंक यूनियन अध्यक्ष राकेश गुर्जर, पलाश कोचर, एसएलडीबी अध्यक्ष मुकेश पीपलीवाल, सचिव भंवर लाल और जयपुर सीसीबी सचिव मनीष गंगवाल सहित कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने संगठन की उस 'फिलोसॉफ़ी' की मुक्त कंठ से सराहना की जिसमें संस्था हित को सर्वोपरि रखा गया है। उन्होंने आमेरा के सकारात्मक दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए आश्वस्त किया कि वे संगठन द्वारा उठाए गए सुझावों से पूर्णतः सहमत हैं। डॉ. शर्मा ने बकाया भुगतान हेतु वित्त विभाग को डी.ओ. लेटर लिखने तथा बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने इन गंभीर विषयों पर विस्तार से लिखित सुझाव आमंत्रित करते हुए शीघ्र ही संगठन के साथ एक औपचारिक बैठक करने का निर्णय लिया है, जो प्रदेश में सहकारी आंदोलन को नई दिशा प्रदान करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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