लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन बैठक में देश भर के सहकार प्रतिनिधियों ने प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों की वित्तीय स्वायत्तता पर रणनीति तैयार की।

सहकारिता क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव और जमीनी स्तर पर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के सर्वांगीण कायाकल्प का शंखनाद करते हुए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सहकार भारती द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन बैठक एवं गोष्ठी का भव्य समापन हो गया। "सहकारी समितियों एवं पैक्स के आर्थिक उन्नयन व आत्मनिर्भर बनाने हेतु" आयोजित इस उच्च स्तरीय राष्ट्रीय मंथन में देश के ग्रामीण अर्थतंत्र को मजबूत करने पर गहन विमर्श हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और पंजाब सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए सहकार भारती के वरिष्ठ पदाधिकारियों, सहकार साथियों, पैक्स समितियों के अध्यक्षों, निदेशकों तथा मुख्य प्रतिनिधियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। मरुधरा की ओर से राजस्थान के कद्दावर सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा और अन्य पैक्स प्रतिनिधियों ने इस राष्ट्रीय चिंतन बैठक में शिरकत कर राजस्थान का पक्ष प्रखरता से रखा।

इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय गोष्ठी की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (अपैक्स बैंक) के चेयरमैन व सभापति जितेंद्र बहादुर सिंह ने की। दो दिनों तक चले इस चिंतन सत्र में पैक्स समितियों के आर्थिक सशक्तीकरण, संपूर्ण कम्प्यूट्रीकरण-डिजिटलीकरण, किसानों को बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराई जाने वाली ऋण सुविधाओं, समितियों के कामकाज में सहकारी विभाग के अनावश्यक और अनुचित हस्तक्षेप, नई समितियों के अंधाधुंध गठन से उत्पन्न हो रही व्यावहारिक स्थितियों, कुशल कार्मिकों की उपलब्धता व उनके तकनीकी प्रशिक्षण, समितियों में आधुनिक नवाचारों के समावेश तथा पैक्स के समक्ष मुंह बाए खड़ी समसामयिक चुनौतियों व उनके व्यावहारिक समाधानों पर देशव्यापी धरातल से आए प्रतिनिधियों ने विस्तार से मंथन किया और अपने-अपने राज्यों के अनुभवों के आधार पर बहुमूल्य सुझाव व्यक्त किए।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ सहकार भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय पाचपोर ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने ओजस्वी मुख्य उद्बोधन में संजय पाचपोर ने सहकारिता आंदोलन की आत्मा को रेखांकित करते हुए कहा कि सहकारिता व्यवस्था वास्तव में भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और पैक्स समितियां इस समूची व्यवस्था की आधारभूत जमीनी इकाई हैं। देश के अन्नदाता किसानों की वास्तविक उन्नति और गांवों के समग्र विकास के लिए अब पैक्स समितियों को सक्षम, पारदर्शी तथा तकनीकी रूप से पूर्णतः सशक्त बनाना समय की सबसे बड़ी पुकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहकारी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पैक्स समितियों के पूर्ण डिजिटलीकरण और उनकी कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता आने से किसानों को ऋण, वैज्ञानिक भंडारण, कृषि उपज विपणन एवं अन्य जरूरी सुविधाएं बेहद सरलता से उपलब्ध हो सकेंगी।

राष्ट्रीय संगठन मंत्री ने सहकारिता के मूल दर्शन को समझाते हुए कहा कि सहकारिता केवल एक सामान्य आर्थिक गतिविधि मात्र नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता, आपसी आत्मीयता और सामूहिक उत्तरदायित्व का एक जीवंत जीवन-दर्शन है। भारत की गौरवशाली सहकार परंपरा समाज को संगठित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम है, इसलिए देश में अच्छी और आदर्श पैक्स को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने पदाधिकारियों को चेताते हुए कहा कि पैक्स के जन प्रतिनिधियों को अपने अधिकारों, दायित्वों और जिम्मेदारियों का पूर्ण बोध होना चाहिए। सहकारी समिति से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पैक्स के उपनियमों (बाय लाज) का आवश्यक रूप से गहरा अध्ययन करना चाहिए ताकि वे समिति का संचालन कुशलता, पारदर्शिता और दक्षता से कर सकें। समितियों को अब सरकार पर अपनी निर्भरता पूरी तरह खत्म कर खुद को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने की नितांत आवश्यकता है, क्योंकि हर छोटी-बड़ी बात के लिए सरकारी निर्भरता से अंततः सहकारी समितियों, संस्थाओं और पूरे आंदोलन की स्वायत्तता कमजोर पड़ती है। किसी भी समिति की कुशलता और मजबूती उसके अध्यक्ष तथा सचिव, व्यवस्थापक या पैक्स मैनेजर के आपसी प्रगाढ़ समन्वय और सहयोग पर ही टिकी होती है।

इसी क्रम में सहकार भारती पैक्स प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रमुख राजदत्त पाण्डेय ने देश भर में सहकारिता के विस्तार और सहकार भारती के सांगठनिक कार्यों की विस्तृत चर्चा करते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने पर बल दिया। उन्होंने पैक्स समितियों के प्रभावी जुड़ाव के लिए कार्यकर्ताओं के अनवरत प्रवास और जीवंत संवाद को अनिवार्य सांगठनिक आवश्यकता बताया।

इस राष्ट्रीय गोष्ठी में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा ने चिंतन बैठक में निकले गहन चर्चा के नीतिगत सार को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय बैठक में यह सर्वसम्मति से तय हुआ है कि सहकार भारती जल्द ही केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों को पैक्स की आत्मनिर्भरता एवं उनके आर्थिक उन्नयन के लिए एक विस्तृत मांग व सुझाव पत्र लिखेगी। इस पत्र के माध्यम से मांग की जाएगी कि नई पैक्स के गठन के लिए पुरानी पैक्स का विभाजन केवल और केवल मूल पैक्स की लिखित सहमति से ही किया जाना चाहिए, क्योंकि बिना सोचे-समझे पैक्स के टुकड़े करना उसकी आर्थिक मजबूती के दृष्टिकोण से कतई व्यावहारिक नहीं है। नई समिति के गठन के समय न्यूनतम सदस्य संख्या 500 निर्धारित होनी चाहिए, ताकि वह अपने ऋण कारोबार के बल पर आर्थिक रूप से सक्षम, सुदृढ़ और आत्मनिर्भर बन सके; सरकारों को इस वित्तीय व्यवहार्यता पर विचार करने के बाद ही सहमति से नई पैक्स बनानी चाहिए। इसके साथ ही पैक्स में कुशल कार्मिकों की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाना बेहद आवश्यक है और पैक्स कार्मिकों को न्यूनतम पारिश्रमिक देने के लिए सरकार से प्रशासनिक व आर्थिक अनुदान प्राप्त होना चाहिए।

प्रतिनिधियों ने मांग उठाई कि सहकारी पैक्स से लेकर शीर्ष संस्थाओं तक की संपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूरी तरह से निष्पक्ष चुनाव समय पर होने चाहिए। पैक्स को सभी सरकारी खाद समितियों जैसे कृभको और इफ़को से अधिकाधिक मात्रा में खाद की आपूर्ति की जानी चाहिए तथा उनका कमीशन मार्जिन भी बढ़ाया जाना चाहिए। राज्य सरकारों द्वारा पैक्स को उनके सभी बकाया भुगतानों, ब्याज अनुदानों और ऋण माफ़ी आदि की राशियों का भुगतान समय पर सीधे हस्तांतरित किया जाना चाहिए। समिति की सदस्यता के लिए सभी आवश्यक अर्हताएं रखने वाले पात्र व्यक्ति को तीन माह के भीतर आवश्यक रूप से सदस्यता प्रदान की जानी चाहिए। देश की सभी पैक्स को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद केंद्र के रूप में अधिकृत किया जाए तथा राज्यों में लगातार बढ़ती हुई पैक्स की संख्या के समानुपात में फसली ऋण राशि के बजट में भारी वृद्धि कर नाबार्ड द्वारा समुचित पुनर्वित्त प्रदान किया जाए। इसके अतिरिक्त जो पैक्स वर्तमान में निष्क्रिय हो चुकी हैं, उन्हें विशेष सरकारी अनुदान देकर पुनः सक्रिय किया जाए ताकि नई समितियों से जुड़े ग्रामीण किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके।

बैठक के अंतिम सत्र में उपस्थित सभी राज्यों के प्रतिनिधियों ने पैक्स समितियों की स्वायत्तता अक्षुण्ण रखने, कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ाने, किसानों को आधुनिक व बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने तथा सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प का पुरजोर आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित सहकार बंधुओं ने सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर ग्राम, समृद्ध किसान एवं सशक्त राष्ट्र के निर्माण के परम संकल्प को दोहराया। इस गरिमामयी बैठक में उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार तथा महामंत्री अरविंद सिंह सहित देश भर के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं समर्पित कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अंत में देश के विभिन्न प्रांतों से आए सभी सहकार प्रतिनिधियों का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित कर इस ऐतिहासिक चिंतन बैठक के समापन की घोषणा की गई।

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