जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आज विकास और सुधार की एक नई इबारत लिखी गई, जहाँ पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा आयोजित क्षेत्रीय मीडिया सम्मेलन 'वार्ता' ने भविष्य के भारत की एक सशक्त तस्वीर पेश की। यह सम्मेलन न केवल सरकारी नीतियों के प्रचार-प्रसार का माध्यम बना, बल्कि ग्रामीण विकास और श्रमिकों के अधिकारों की दिशा में होने वाले युगांतकारी परिवर्तनों का साक्षी भी रहा। कार्यक्रम का मुख्य केंद्र नव-पारित 'विकसित भारत जी-राम-जी' कानून और आगामी 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली चार नई श्रम संहिताएं रहीं, जो देश के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को पुनर्जीवित करने का वादा करती हैं।

सम्मेलन की मुख्य अतिथि, राजस्थान सरकार की ग्रामीण विकास विभाग सचिव एवं रोज़गार गारंटी स्कीम की आयुक्त श्रीमती पुष्पा सत्यानी ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि 'विकसित भारत जी-राम-जी' कानून के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल कामगारों के लिए श्रम दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है। उन्होंने विस्तार से समझाया कि कैसे पुरानी मनरेगा योजना को अब अधिक विकासोन्मुख और परिणामोन्मुखी बनाया गया है। श्रीमती सत्यानी ने रेखांकित किया कि इस नए कानून में फसलों की बुवाई और कटाई के 60 दिनों को विशेष रूप से अधिसूचित किया गया है, जिससे श्रमिकों की आय में सीधा इजाफा होगा। सबसे क्रांतिकारी कदम इस योजना को 'पीएम गति शक्ति मिशन' से जोड़ना है, जो ग्रामीण बुनियादी ढांचे को नई गति प्रदान करेगा। उन्होंने श्रमिकों को आश्वस्त किया कि फॉर्म 6 भरने के 15 दिनों के भीतर काम न मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान पहले की तरह ही सुरक्षित और सुदृढ़ है।

तकनीकी सत्र की शुरुआत करते हुए रोज़गार गारंटी स्कीम के अधीक्षण अभियंता श्री आई. पी. अग्रवाल ने 'विकसित भारत जी-राम-जी' विधेयक पर एक व्यापक प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों की भूमिका जल सुरक्षा और मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने में पहले जैसी ही प्रधान रहेगी, किंतु अब इसमें अन्य सरकारी विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विकास कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सोशल ऑडिट टीमों के माध्यम से कड़ी निगरानी का तंत्र स्थापित किया गया है।

वहीं, देश के औद्योगिक परिदृश्य में आने वाले बदलावों पर चर्चा करते हुए भारत सरकार के उप मुख्य श्रम आयुक्त श्री निरंजन कुमार ने चार नई श्रम संहिताओं की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 29 पुराने और जटिल श्रम कानूनों को इन चार संहिताओं में समाहित करना समय की मांग थी। श्री निरंजन कुमार ने विश्वास जताया कि ये नई संहिताएं 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा देने के साथ-साथ श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और उनके आर्थिक हितों के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित करेंगी। उन्होंने आधिकारिक रूप से सूचित किया कि ये कानून 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में पत्र सूचना कार्यालय जयपुर के निदेशक श्री अनुभव बैरवा ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने पत्रकारिता की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि मीडिया सरकार और जनता के बीच एक अटूट सेतु है, जिसका मुख्य उद्देश्य जनकल्याणकारी योजनाओं की सटीक जानकारी समाज के अंतिम छोर तक पहुँचाना है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में क्षेत्रीय श्रम आयुक्त श्री लक्ष्मी नारायण मीणा, पत्र सूचना कार्यालय के उप निदेशक श्री धर्मेश भारती और सहायक निदेशक श्री अमित कनौजिया सहित प्रदेश के विभिन्न मीडिया संस्थानों के वरिष्ठ पत्रकारों ने सहभागिता की। यह सम्मेलन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि नीतियों का सही क्रियान्वयन और मीडिया की सक्रियता ही 'विकसित भारत' के संकल्प को धरातल पर चरितार्थ करेगी।

Pratahkal Newsroom

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