रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक: विशेषज्ञों ने वन्यजीव संरक्षण पर किया मंथन
पांचवें इंटरनेशनल टाइगर वीक में डॉ. लतिका नाथ और डॉ. अनिश अंधेरिया ने वाइल्डलाइफ पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास के साथ संतुलन बनाने पर जोर दिया।

तस्वीर में बाएं से दाएं वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के सीईओ डॉ. अनिश अंधेरिया, अंतारा चटर्जी और डॉ. लतिका नाथ मंच पर चर्चा करते हुए दिख रहे हैं।
रणथंभौर की अरावली पर्वतमालाओं के बीच शुक्रवार को पांचवें 'रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक' (ITW) का भव्य आगाज हुआ, जिसने बाघ संरक्षण की दिशा में एक नई और बुलंद आवाज को जन्म दिया है। लिव4फ्रीडम एलएलपी द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय आयोजन 'कंजर्व इंडियाज़ फाइनेस्ट टाइगर्स' की थीम पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य बाघों के संरक्षण के लिए प्रभावी समाधान तलाशना और इस दिशा में वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाना है। कार्यक्रम की शुरुआत आमाघाटी वाइल्डलाइफ रिज़ॉर्ट और ऐतिहासिक कैसल झूमर बावड़ी में स्कूली बच्चों द्वारा की गई वाइल्डलाइफ आधारित चित्रकला प्रतियोगिता से हुई, जहां नन्हे हाथों ने बाघ संरक्षण का जीवंत संदेश उकेरा।
आयोजन के पहले दिन की शाम को आमाघाटी वाइल्डलाइफ रिज़ॉर्ट में आयोजित गंभीर चर्चा सत्रों में विषय विशेषज्ञों ने वन्यजीवों के भविष्य पर चिंता और समाधान दोनों साझा किए। दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश धर्मेश शर्मा के स्वागत उद्बोधन के साथ शुरू हुए इस सत्र में कंजर्वेशन ईकोलॉजिस्ट डॉ. लतिका नाथ ने पर्यटन और संरक्षण के बीच आवश्यक संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने नेपाल, भूटान और अफ्रीकी देशों के मॉडलों का उदाहरण देते हुए कहा कि वाइल्डलाइफ सफारी में पर्यटकों की संख्या सीमित होनी चाहिए और पर्यटन से प्राप्त आय का एक हिस्सा सीधे तौर पर संरक्षण कार्यों पर खर्च किया जाना चाहिए। वहीं, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. अनिश अंधेरिया ने विकास और पर्यावरण के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि हाईवे और रेलवे जैसी अधोसंरचनाओं का नियोजन वन्यजीवों के जीवन को ध्यान में रखकर किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाघों का अस्तित्व देश के हाइड्रोलॉजिकल स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने रणथंभौर के चर्चित बाघों जैसे 'मछली', 'कॉलरवाली' और 'डॉलर' के जीवन सफर को साझा किया। वन्यजीव फिल्म निर्माता सुबैया नल्ला मुत्थु द्वारा प्रदर्शित डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से मछली के साहसिक जीवन को जीवंत किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान 'रॉयल रणथंभौर- कंजर्व इंडियाज़ फाइनेस्ट टाइगर' शीर्षक से एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी दी गई, जिसने बाघों के प्रति संवेदनशीलता को और गहरा किया। लिव4फ्रीडम के पार्टनर आनंद भारद्वाज और सुनील मंगल ने बताया कि यह मंच सरकार, संरक्षणविदों और नागरिक समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है।
तीन दिवसीय इस आयोजन का समापन शनिवार को महत्वपूर्ण चर्चा सत्रों और प्रतिष्ठित 'कंजर्वेशन अवॉर्ड्स' के साथ होगा। पंजाब के पूर्व राज्यपाल वी. पी. सिंह बदनौर की अध्यक्षता वाली जूरी द्वारा 11 श्रेणियों में दिए जाने वाले ये पुरस्कार उन लोगों और संस्थाओं को सम्मानित करेंगे, जिन्होंने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में उत्कृष्ट योगदान दिया है। यह आयोजन न केवल रणथंभौर की गौरवशाली विरासत को संजोने का प्रयास है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बाघों के सुरक्षित भविष्य का एक संकल्प भी है।

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