राम जल सेतु लिंक परियोजना: मंत्री सुरेश रावत ने किया चंबल एक्वाडक्ट निरीक्षण
जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने 2230 करोड़ की लागत से बन रहे 2.3 किमी लंबे चंबल एक्वाडक्ट के कार्यों की समीक्षा की और जून 2028 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए।

जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत सोमवार को बूंदी के गुहाटा में राम जल सेतु लिंक परियोजना के तहत निर्माणाधीन चंबल एक्वाडक्ट का पैदल चलकर निरीक्षण करते हुए।
जयपुर, 9 फरवरी। पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों के लिए संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना (राम जल सेतु लिंक परियोजना) वरदान साबित होगी। इस जीवनदायिनी परियोजना के प्रगतिरत कार्यों का निरीक्षण करने सोमवार को जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत बूंदी के गुहाटा पहुंचे। उन्होंने निर्माणाधीन चंबल एक्वाडक्ट कार्य स्थल पर अभियंताओं से चर्चा कर परियोजना की विस्तृत जानकारी ली।
चंबल एक्वाडक्ट का निरीक्षण और समीक्षा
- जल संसाधन मंत्री ने किया चंबल एक्वाडक्ट कार्य स्थल का निरीक्षण।
- श्री रावत ने करीब 2 किलोमीटर पैदल चलकर हर एक पॉइंट का गहनता से निरीक्षण किया।
- कार्य स्थल पर अधिकारियों और कार्यकारी एजेंसी के साथ की समीक्षा बैठक।
- गुणवत्ता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखने के दिए निर्देश।
- कार्यरत अभियंताओं और श्रमिकों से किया संवाद।
- श्रम शक्ति की तारीफ कर सुरक्षा मानकों की पालना करने के लिए निर्देश।
"मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में सतत् प्रयासों से जल सुरक्षा की दिशा में एक्वाडक्ट मील का पत्थर साबित होगा। इसके कार्य मिशन मोड पर किए जा रहे हैं। चम्बल नदी पर 2.3 किलोमीटर लम्बाई में एक्वाडक्ट का निर्माण किया जा रहा है, जिसे जून, 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा।"
परियोजना की तकनीकी जानकारी और लागत
श्री रावत ने बताया कि राम जल सेतु लिंक परियोजना के प्रथम चरण के पैकेज-2 के अंतर्गत 2 हजार 230 करोड़ रुपए की लागत से एक्वाडक्ट बनाया जा रहा है। (पाठ्य में उल्लेखित अन्य लागत विवरण: 2 हजार 330 करोड़ रुपए)।
- कनेक्टिविटी: यह एक छोर में कोटा जिले की दीगोद तहसील के पीपलदा समेल गांव और दूसरे छोर में बूंदी जिले के इंद्रगढ़ तहसील के गुहाटा गांव से जुड़ेगा।
- एक्वाडक्ट की लम्बाई: चम्बल नदी पर बन रहे एक्वाडक्ट की लम्बाई 2280 मीटर (2.3 किमी) है।
- आयाम: इसकी आंतरिक चौड़ाई 41.25 मीटर और ऊंचाई 7.7 मीटर है।
- समय सीमा: मई, 2025 में कार्य शुभारंभ किया गया और जून, 2028 में कार्य पूर्ण होगा।
जल वितरण की कार्यप्रणाली
इसके बनने से कालीसिंध नदी पर निर्मित नवनेरा बैराज से पानी पम्प हाउस से लिफ्ट कर मेज नदी में छोड़ा जाएगा। इसके बाद मैज बैराज से पम्प हाउस व फीडर के जरिए गलवा बांध तक और वहां से बीसलपुर और ईसरदा बांध में पहुंचाया जाएगा। इस एक्वाडक्ट के बनने से आमजन को आवागमन के लिए अतिरिक्त मार्ग भी उपलब्ध होगा।
दूरदृष्टि और व्यापक प्रभाव
"यह परियोजना मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की दूरदृष्टि और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का सबसे बड़ा उदाहरण है। जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में यह परियोजना प्रदेश के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होगी और मुख्यमंत्री श्री शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान जल आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से अग्रसर होगा।"
ईआरसीपी को वृहद स्वरूप देते हुए संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना (लगभग 90 हजार करोड़ रूपए) तैयार की गई है।
परियोजना के लाभ:
- परियोजना के प्रथम चरण में राज्य के 17 जिलों की लगभग 3 करोड़ 25 लाख आबादी को पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी।
- सिंचाई एवं उद्योगों के लिए भी जल उपलब्ध होगा।
- इससे प्रदेश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान श्री रावत ने विभाग के अभियंताओं और श्रमिकों द्वारा समयबद्ध कार्यों को गति देने के लिए तारीफ की। निरीक्षण के बाद श्री रावत ने अभियंताओं के साथ समीक्षा बैठक ली।

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