जयपुर/बीकानेर, 16 अक्टूबर। राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने पशुपालन को देश और प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए इसके विकास, शोध और ग्रामीण समुदायों को सतत आजीविका उपलब्ध कराने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने पशु चिकित्सा, पशु विज्ञान और कृषि क्षेत्र में अध्ययनरत बेटियों से शोध कार्यों में आगे बढ़कर योगदान देने का आह्वान किया। समारोह में 623 विद्यार्थियों को उपाधियां और 42 विद्यार्थियों को विभिन्न श्रेणियों में पदक प्रदान किए गए।

शुक्रवार को बीकानेर स्थित राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि पशुपालन अर्थव्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने, खाद्य एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने और ग्रामीण समुदायों को सतत आजीविका प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राज्यपाल ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। देश के दुग्ध उत्पादन में गिर, थारपारकर, साहिवाल और मुर्रा जैसी उन्नत नस्लों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बताया कि देश के कुल दुग्ध उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी लगभग 14.51 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

उन्होंने डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है। कृषि और पशुपालन को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि किसान खेती के साथ दुग्ध उत्पादन करके अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

पशु चिकित्सा, पशु विज्ञान और कृषि क्षेत्र में अध्ययनरत बेटियों का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। उन्हें शोध के क्षेत्र में भी आगे बढ़कर योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभाशाली युवाओं की कमी नहीं है। अमेरिका सहित अन्य विकसित देशों की बड़ी कंपनियां भारत के युवा चला रहे हैं और यही देश की वास्तविक ताकत है।

राज्यपाल ने भारतीय युवाओं की बौद्धिक क्षमता और कल्पनाशक्ति को सशक्त बताते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से पहली कक्षा से ही बच्चों के बौद्धिक स्तर को और अधिक मजबूत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी तरुण है। युवाओं को अपनी क्षमताओं का अधिकाधिक उपयोग देश को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहिए।

युवा शक्ति को देश की बड़ी ताकत बताते हुए श्री बागडे ने कहा कि यही ताकत दुनिया के लिए सबसे बड़ी चिंता भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विदेशी ताकतें भारतीय युवाओं को खोखला करने और उन्हें नशे की ओर धकेलने का कुत्सित प्रयास कर रही हैं। उन्होंने युवाओं से ऐसी आग से दूर रहने का आह्वान किया और जागरूक नागरिकों से युवाओं को नशे से दूर रखने के प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नशामुक्त भारत की परिकल्पना को साकार करने में प्रत्येक व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा।

शिक्षा के उद्देश्य पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विवेक, समझ, नैतिकता और ईमानदारी का विकास करते हुए देश की प्रगति में योगदान देना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के इस उद्देश्य को समझकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में 2.55 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कन्या छात्रावास का लोकार्पण किया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर के वर्चुअल टूर, पुस्तिका ‘राजुवास अवलोकन’, विश्वविद्यालय के वार्षिक प्रतिवेदन 2025-26 और राजुवास न्यूजलेटर के नए अंक का भी लोकार्पण किया।

दीक्षांत समारोह में 462 विद्यार्थियों को स्नातक, 141 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर और 20 विद्यार्थियों को विद्या-वाचस्पति सहित कुल 623 उपाधियां प्रदान की गईं। वहीं, दो विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 36 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, दो विद्यार्थियों को रजत पदक और दो विद्यार्थियों को कांस्य पदक प्रदान किए गए। इस प्रकार कुल 42 पदक वितरित किए गए।

समारोह में विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। दीक्षांत समारोह में उपाधियों और पदकों का वितरण उच्च शिक्षा के साथ पशु चिकित्सा, पशु विज्ञान, कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में शोध और योगदान के महत्व को रेखांकित करने वाला प्रमुख अवसर रहा।


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