जयपुर। गुलाबी नगरी के ऐतिहासिक आंगन में आयोजित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 की गूंज इस बार महलों और किताबों की सरहदों को लांघकर राजस्थान के दूर-दराज गांवों की चौपालों तक जा पहुंची है। होटल क्लार्क्स आमेर के भव्य परिसर में जब राजीविका (राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद) की महिलाओं ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई, तो बौद्धिक चर्चाओं के बीच एक नए भारत की तस्वीर उभरती दिखाई दी। इस वैश्विक मंच पर आयोजित विशेष सत्र “Legenda: The Real Women Behind the Myths” ने न केवल इतिहास के पन्नों को पलटा, बल्कि वर्तमान में ग्रामीण अंचलों में आ रहे बदलाव की जीवंत गवाही भी पेश की। इस संवाद में प्रतिष्ठित इतिहासकार सुश्री जनीना रामिरेज़ और प्रख्यात पत्रकार व लेखिका सुश्री नारायणी बसु ने अपनी वैचारिक गहराई से सत्र को ऊंचाई प्रदान की, जहाँ इतिहास के नारी पात्रों और आज की जुझारू महिलाओं के संघर्षों का अनूठा संगम देखने को मिला।

इस महत्वपूर्ण गरिमामय आयोजन का औपचारिक आगाज ग्रामीण विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती श्रेया गुहा (IAS) के संबोधन के साथ हुआ। श्रीमती गुहा ने राजीविका के अभिनव प्रयासों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हो रहे आमूलचूल परिवर्तनों को रेखांकित करते हुए कहा कि ये महिलाएं आज केवल अपने परिवार का आधार नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर नेतृत्व और सशक्तिकरण की नई परिभाषा लिख रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रामीण महिलाओं की यह यात्रा संघर्ष से सफलता की ओर बढ़ता वह कदम है, जो महिला नेतृत्व वाले विकास (Women-led Development) के संकल्प को चरितार्थ करता है। सत्र के दौरान जब राजीविका की महिलाओं ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय श्रोताओं के साथ संवाद किया, तो उनकी आत्मविश्वास भरी आवाज़ ने यह सिद्ध कर दिया कि अवसर मिलने पर गांव की पगडंडियों से निकलकर भी वैश्विक विमर्श का हिस्सा बना जा सकता है।

उत्सव की रौनक के बीच टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक श्री संजय के. रॉय ने भी विशेष रूप से राजीविका की इन महिला उद्यमियों और प्रतिनिधियों से भेंट की। उन्होंने महिलाओं के भीतर पनप रहे नए आत्मविश्वास और समाज में उनके द्वारा लाए जा रहे सकारात्मक बदलावों की मुक्त कंठ से सराहना की। श्री रॉय ने इन महिलाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनकी जीवटता को प्रेरणादायी बताया। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में राजीविका की यह सक्रिय भागीदारी महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है जिसके तहत ग्रामीण भारत की प्रतिभाओं को मुख्यधारा की बौद्धिक चर्चाओं और वैश्विक मंचों पर सम्मानजनक स्थान दिलाया जा रहा है। यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि जब ग्रामीण महिला की आवाज़ बुलंद होती है, तो उसकी गूंज सात समंदर पार तक सुनाई देती है।

Pratahkal Newsroom

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