राजीविका दिवाली मेले में पांचवें दिन उमड़ी भीड़, सवाई माधोपुर की ब्लैक पॉटरी बनी आकर्षण
जयपुर स्थित IGPRS परिसर में आयोजित मेले के पांचवें दिन भारी भीड़ उमड़ी; लाइव डेमोंस्ट्रेशन और पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों ने खरीदारों को आकर्षित किया।

महिला कारीगर से मिट्टी के बर्तन और ब्लैक पॉटरी खरीदते खरीदार जयपुर के राजीविका मेले में दिख रहे हैं।
जयपुर में आयोजित राजीविका दिवाली मेला-2026 के पांचवें दिन खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। मेले में ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों के हस्तशिल्प, हैंडलूम, गृह सज्जा और पारंपरिक खाद्य उत्पादों की खरीदारी में तेजी देखने को मिली। खास तौर पर सवाई माधोपुर की ब्लैक पॉटरी ने आगंतुकों का ध्यान खींचा। वहीं, दीये और अगरबत्ती बनाने के लाइव डेमोंस्ट्रेशन में शामिल होकर लोग पारंपरिक हुनर सीखते नजर आए।
जयपुर स्थित इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान (IGPRS) परिसर में राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) की ओर से आयोजित इस मेले में रविवार, 1 नवंबर को पांचवें दिन बड़ी संख्या में खरीदार पहुंचे। 100 से अधिक स्टॉल्स पर ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों के हस्तशिल्प, हैंडलूम, गृह सज्जा की वस्तुएं, पारंपरिक खाद्य उत्पाद और अन्य स्थानीय उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। दिवाली नजदीक आने के साथ सजावटी सामग्री, हस्तनिर्मित उपहारों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की मांग बढ़ी है। खरीदारी के अलावा लाइव डेमोंस्ट्रेशन, पारंपरिक कलाओं और राजस्थानी व्यंजनों ने भी आगंतुकों को आकर्षित किया।
मेले में जयपुर की ब्लू पॉटरी के साथ सवाई माधोपुर की ब्लैक पॉटरी विशेष आकर्षण बनी हुई है। अपनी विशिष्ट बनावट और पारंपरिक कारीगरी के लिए पहचानी जाने वाली ब्लैक पॉटरी से तैयार उत्पादों को खरीदार पसंद कर रहे हैं। इस कला से जुड़े कारीगर पारंपरिक शिल्प को आधुनिक डिजाइन और उपयोगिता के अनुरूप नए रूप दे रहे हैं। आगंतुक इन उत्पादों को देखने के साथ उनकी खरीदारी में भी रुचि दिखा रहे हैं। ब्लैक पॉटरी का स्टॉल ग्रामीण शिल्पकारों की पारंपरिक कला को नए बाजार और ग्राहकों तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।
मेले में दीया मेकिंग और अगरबत्ती मेकिंग के लाइव डेमोंस्ट्रेशन में भी लोगों की विशेष दिलचस्पी देखने को मिल रही है। आगंतुक स्वयं चाक पर मिट्टी के दीये बनाने और मशीन के माध्यम से अगरबत्ती तैयार करने की प्रक्रिया सीख रहे हैं। इसके अलावा स्टैच्यू मेकिंग और ऊन से विभिन्न उत्पाद तैयार करने की लाइव गतिविधियों को देखने के लिए भी भीड़ जुट रही है। इन गतिविधियों के माध्यम से पारंपरिक और घरेलू कौशल का प्रदर्शन किया जा रहा है। साथ ही महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने और बिक्री बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।
दिवाली को देखते हुए मेले में दीये, कैंडल, रंगोली, तोरण और अन्य सजावटी एवं गृह सज्जा उत्पादों की खरीदारी बढ़ी है। जूट और ऊन से तैयार बैग, हस्तनिर्मित जूतियां, मोजड़ी, कपड़े के खिलौने और कीचेन भी खरीदारों को पसंद आ रहे हैं। कोटा डोरिया की साड़ियां, ब्लू पॉटरी, पारंपरिक कशीदाकारी, डोरमैट, कारपेट और अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों की भी अच्छी मांग है। अलग-अलग स्वाद वाली कैंडी और पान माउथ फ्रेशनर्स भी आगंतुकों का ध्यान खींच रहे हैं। विभिन्न स्टॉल्स पर उपलब्ध उत्पादों की विविधता के कारण लोगों को एक ही स्थान पर दिवाली की खरीदारी के कई विकल्प मिल रहे हैं।
खानपान के शौकीनों के लिए भी मेला आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विभिन्न फूड स्टॉल्स पर दाल-बाटी-चूरमा, केर-सांगरी और अन्य पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। वहीं, ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से तैयार अचार, पापड़, गट्टा मसाला और अन्य स्थानीय खाद्य उत्पादों की भी बिक्री हो रही है। इससे महिला समूहों को अपने खाद्य उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने और कारोबार को बढ़ावा देने का अवसर मिल रहा है।
राजीविका दिवाली मेला-2026 ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों के उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। यहां महिलाएं अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों के सामने प्रस्तुत कर रही हैं। उन्हें खरीदारों की पसंद समझने, नए ग्राहकों से जुड़ने और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादों को बेहतर बनाने का अवसर मिल रहा है। मेले के जरिए पारंपरिक हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के साथ स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
राजीविका दिवाली मेला-2026 का आयोजन 28 अक्टूबर से 4 नवंबर तक किया जा रहा है। मेले का समय प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से रात्रि 9 बजे तक निर्धारित है और आमजन के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है। यहां 100 से अधिक स्टॉल्स पर ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों के हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री जारी है। यह आयोजन लोगों को दिवाली की खरीदारी के साथ राजस्थान की पारंपरिक कला, शिल्प और स्थानीय उत्पादों को करीब से जानने का अवसर दे रहा है। वहीं, ग्रामीण महिलाओं के हुनर को बाजार, उत्पादों को पहचान और आजीविका को नए अवसरों से जोड़ने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका सामने आ रही है।

