जयपुर में गूंजी राजस्थानी संस्कृति की धमक: आमेर की वैभवशाली विरासत देख मंत्रमुग्ध हुए 40 देशों के संसदीय मेहमान
जयपुर के आमेर महल में 40 राष्ट्रमंडल देशों के 120 संसदीय प्रतिनिधियों का भव्य आगमन हुआ। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी द्वारा स्वागत के बाद मेहमानों ने शीश महल और मान सिंह महल की अद्भुत स्थापत्य कला का अवलोकन किया। राजस्थानी आतिथ्य और गौरवशाली इतिहास से रूबरू होकर विदेशी प्रतिनिधि मंत्रमुग्ध नजर आए। जानिए जयपुर दौरे की पूरी रिपोर्ट।

जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर की ऐतिहासिक फिजाओं में शनिवार को उस समय एक नई चमक देखने को मिली, जब विश्वविख्यात आमेर महल की प्राचीरें 40 राष्ट्रमंडल देशों के 120 संसदीय प्रतिनिधियों की साक्षी बनीं। दो दिवसीय प्रवास पर राजस्थान की धरा पर पहुंचे इस उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत स्वयं राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किया। यह दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजस्थान की स्थापत्य कला को वैश्विक पटल पर पुनः गौरवान्वित करने वाला एक स्वर्णिम अध्याय भी साबित हुआ है।
जैसे ही यह 120 सदस्यीय दल आमेर महल के मुख्य द्वार पर पहुंचा, उनका स्वागत पारंपरिक राजस्थानी रीति-रिवाजों और लोक वाद्ययंत्रों की मंगल ध्वनि के साथ किया गया। आतिथ्य की इस जीवंत परंपरा ने विदेशी मेहमानों का दिल जीत लिया। अनुभवी गाइडों के नेतृत्व में शुरू हुए इस भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों ने राजपूतकालीन स्थापत्य कला के बारीकियों को बड़े करीब से समझा। दल ने दीवान-ए-आम की भव्यता, दीवान-ए-खास की सुक्ष्म नक्काशी और 27 कचहरी के ऐतिहासिक महत्व को जाना। गणेश पोल की कलात्मकता और मान सिंह महल के गलियारों में घूमते हुए प्रतिनिधिमंडल भारत के गौरवशाली इतिहास की गहराइयों में डूबा नजर आया।
इस भ्रमण का सबसे रोमांचक पड़ाव 'शीश महल' रहा। कांच के टुकड़ों की अद्भुत कारीगरी और वहां से दिखने वाले मावठा सरोवर व केसर क्यारी बाग के मनोरम दृश्य ने मेहमानों को विस्मित कर दिया। कई प्रतिनिधियों ने राजस्थान की इस शिल्प परंपरा को विश्व की श्रेष्ठतम विरासतों में से एक बताया। प्रतिनिधिमंडल में शामिल विभिन्न देशों की विधायिकाओं के अध्यक्षों और उच्च संसदीय अधिकारियों ने इस अनुभव को 'अविस्मरणीय' करार देते हुए आमेर दुर्ग को भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक माना। 17 और 18 जनवरी के इस प्रवास के दौरान यह दल जयपुर की प्रशासनिक और सांस्कृतिक विशिष्टताओं से रूबरू होगा, जो आने वाले समय में राजस्थान और राष्ट्रमंडल देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

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