जाति जनगणना में 57 उपजातियों को 'यादव' में शामिल करने की मांग तेज, राजस्थान यादव महासभा का देशव्यापी अभियान
राजस्थान यादव महासभा ने जाति जनगणना में 57 उपजातियों को केवल "यादव" के रूप में दर्ज करने की मांग उठाई। जयपुर से शुरू हुआ अभियान अब देशभर में तेज होगा।

तस्वीर में दिख रहा राजस्थान यादव महासभा का प्रतिनिधिमंडल जयपुर में एक आधिकारिक बैठक के दौरान जनगणना निदेशक को ज्ञापन पत्र सौंपते हुए।
आगामी जाति जनगणना को लेकर राजस्थान यादव महासभा ने अपनी मांग को तेज करते हुए मंगलवार को जयपुर में निदेशक जनगणना, राजस्थान से मुलाकात की। महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि जाति जनगणना के दौरान यादव समाज की विभिन्न उपजातियों को अलग-अलग दर्ज करने के बजाय जाति कॉलम में केवल "यादव" दर्ज किया जाए।
महासभा के अनुसार, देशभर में स्थानीय उपनामों के कारण यादव समाज को सरकारी अभिलेखों में 57 अलग-अलग नामों से दर्ज किया जाता है। महासभा का दावा है कि वर्ष 1931 की जाति जनगणना के आधार पर इन सभी उपजातियों की संयुक्त आबादी देश की कुल जनसंख्या का 21.8 प्रतिशत थी। महासभा का कहना है कि वर्ष 1931 की जाति जनगणना में अंग्रेजों ने साजिश कर यादव जाति का बंटवारा कर दिया था, लेकिन अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए महासभा ने महाअभियान शुरू किया है, जिसके तहत लोगों को जागरूक किया जाएगा और केंद्र सरकार व जनगणना आयुक्त से सभी उपजातियों को यादव में क्लब करने का अनुरोध किया जाएगा।
महासभा ने बताया कि वर्ष 2027 से प्रस्तावित जाति जनगणना को लेकर अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा पहले भी 1 जुलाई को दिल्ली में महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त से मिलकर यह मांग उठा चुकी है। महासभा की मांग है कि यादव समाज की सभी 57 उपजातियों को एकीकृत कर "यादव" श्रेणी में शामिल किया जाए तथा जनगणना प्रगणकों को निर्देश दिए जाएं कि यदि कोई व्यक्ति उपजाति बताए तो भी जाति कॉलम में "यादव" ही दर्ज किया जाए।
महासभा ने इस विषय पर देशव्यापी जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय भी लिया है। इसके तहत पदाधिकारी गांव-गांव जाकर लोगों को जाति कॉलम में "यादव" दर्ज करवाने के लिए जागरूक करेंगे। महासभा के अनुसार, 15 से 31 जुलाई तक सभी राज्यों में राज्य जनगणना निदेशकों, 1 से 15 अगस्त तक संभागीय आयुक्तों, 16 से 31 अगस्त तक जिला कलेक्टरों तथा 1 से 30 सितंबर तक उपखंड अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार एवं जनगणना आयुक्त से 57 उपजातियों को "यादव" में शामिल करने की मांग की जाएगी। महासभा का कहना है कि इससे भविष्य में जनकल्याणकारी योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में यादव समाज का समग्र विकास और कल्याण सुनिश्चित हो सकेगा।
महासभा ने यह भी कहा कि राजस्थान में "यादव" और "अहीर" एक ही जातीय पहचान के रूप में प्रचलित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में "अहीर" शब्द के अधिक प्रचलन के कारण एक ही समुदाय के अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज होने की संभावना बनी रहती है। इसी आधार पर महासभा ने जनगणना प्रक्रिया में एकरूपता सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. करण सिंह यादव, राष्ट्रीय महासचिव दिनेश यादव, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र यादव, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष हरसहाय यादव, युवा प्रदेश अध्यक्ष मदन यादव, राष्ट्रीय सचिव मंजू यादव, राष्ट्रीय सचिव विपिन यादव, राष्ट्रीय सचिव डी.आर. यादव, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य उदयबीर यादव, मीना यादव यूपी महिला अध्यक्ष व प्रभारी, धर्मवीर यादव, ओम प्रकाश यादव कोषाध्यक्ष युवा यादव महासभा, अर्जुन यादव, चीफ वार्डन हॉस्टल तथा गौतम यादव युवा महासभा सहित गणमान्य सदस्य मौजूद रहे। महासभा ने स्पष्ट किया कि वह केंद्र सरकार और जनगणना आयुक्त के समक्ष अपनी मांग को संगठित रूप से आगे भी उठाती रहेगी।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
