जयपुर, 21 अप्रैल। राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी कही जाने वाली महिला शक्ति को खेती-किसानी और पशुपालन के क्षेत्र में और अधिक उन्नत व सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के कुशल निर्देशन में अब प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में महिला कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं बुवाई, रोपाई, निराई, गुड़ाई, कटाई और भंडारण जैसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में सक्रिय योगदान दे रही हैं, और अब उनकी इस भागीदारी को वैज्ञानिक आधार देने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर इन विशेष सत्रों की रूपरेखा तैयार की गई है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के दौरान 11 हजार 019 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 3 लाख 30 हजार 570 महिला कृषकों को लाभान्वित कर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए गए हैं।

आयुक्त कृषि श्री नरेश कुमार गोयल के अनुसार, इन प्रशिक्षणों में समावेशी विकास पर जोर देते हुए लघु-सीमान्त, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिला कृषकों को प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। प्रशिक्षण स्थलों का चयन पूरी पारदर्शिता और नवीनता के साथ किया जाएगा; यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रशिक्षण उसी गांव में हो जहां पिछले दो वर्षों में ऐसा कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ हो, ताकि सूचनाओं की पुनरावृत्ति न हो और नवीनता बनी रहे। इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत फसलों की उन्नत बीज उत्पादन तकनीक, मृदा एवं जल परीक्षण का महत्व, नमूनों का संकलन, संतुलित उर्वरक एवं समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन के साथ-साथ जैविक खेती और जैविक खाद निर्माण की विधियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, बदलते परिवेश में जल संरक्षण की महत्ता को देखते हुए बूंद-बूंद (ड्रिप) सिंचाई, फव्वारा सिंचाई, पाइप-लाइन और डिग्गी निर्माण के माध्यम से पानी के कुशल उपयोग तथा फसल अवशेष प्रबंधन व कीटों के वैज्ञानिक नियंत्रण की बारीकियां भी सिखाई जाएंगी।

प्रशिक्षण सत्रों में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव साझा करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों, राजीविका के बीपीएम और प्रगतिशील कृषकों को भी मंच प्रदान किया जाएगा। महिला कृषकों की ज्ञानार्जन क्षमता को परखने के लिए प्रशिक्षण के अंत में एक वस्तुनिष्ठ परीक्षा (Test) आयोजित होगी, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त महिलाओं को किसान टॉर्च, लोहे की बाल्टी, तश्ला, खाद-बीज जैसी उपयोगी सामग्री से पुरस्कृत किया जाएगा। श्री नरेश कुमार गोयल ने स्पष्ट किया कि इस योजना का मूल उद्देश्य महिला कृषकों को विभागीय अनुदान प्रक्रियाओं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाना है। राज्य सरकार का यह प्रयास न केवल सतत और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देगा, बल्कि भविष्य में महिला कृषकों को कृषि क्षेत्र में एक नए नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करेगा।

Pratahkal Newsroom

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